सीबीआई ने राठौड़ की अग्रिम जमानत का विरोध किया

सीबीआई ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय को सौंपे अपने जवाब में कहा है कि राठौड़ सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। राठौड़ ने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इससे पहले आठ जनवरी को पंचकुला सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

सीबीआई के वकील ने उच्च न्यायालय को सौंपे जवाब में कहा, "पंचकुला अदालत द्वारा अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज करना इस मामले के लिए उचित कारण देता है। इस बात की संभावना है कि राठौड़ सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों पर दवाब बना सकता है क्योंकि वह राज्य में उच्च पद पर रह चुका है। "

राठौड़ के खिलाफ 29 दिसंबर को दो नई प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। सीबीआई के वकील अनमोल रत्तन सिधु ने आईएएनएस से कहा, "राठौड़ को गिरफ्तारी से किसी भी प्रकार की राहत दिए जाने का हमने विरोध किया है क्योंकि वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। "

सिधु ने कहा, "हमारी टीम सबूतों को एकत्र कर रही है। हम इस मामले में पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं अपना रहे हैं। हमारा उदेश्य न्याय सुनिश्चित करना है। "

राठौड़ के खिलाफ पांच जनवरी को दर्ज प्राथमिकी में उस पर रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था।

उधर, राठौड़ की वकील और उसकी पत्नी आभा राठौड़ ने कहा कि 30 सदस्यीय सीबीआई की टीम गत छह दिनों में राठौड़ के खिलाफ कोई सबूत इकट्ठा नहीं कर सकी।

मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश सबीना ने सीबीआई से कहा कि वह राठौड़ के खिलाफ दर्ज तीसरी प्राथमिकी के संबंध में अपना जवाब सौंपे। मामले की अगली सुनवाई 25 जनवरी को होगी।

गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौड़ ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और उसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।

सीबीआई की विशेष अदालत ने रुचिका मामले में राठौड़ को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत मिल गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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