ढकोसला है यमुना का स्वच्छता अभियान : आंदोलनकारी

आगरा, 18 जनवरी (आईएएनएस)। आगरा के जिलाधिकारी और निगमायुक्त की अगुवाई में विभिन्न अधिकारियों ने यमुना नदी के बालकेश्वर घाट पर स्वच्छता अभियान चलाया लेकिन स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों ने इसे ढकोसला करार दिया है।

निवासियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि सरकार विभिन्न नालों से नदी में बहने वाले औद्योगिक अपशिष्ट विषाक्त पदार्थो के बहाव को नहीं रोक सकी है।

रविवार को जिलाधिकारी एम.के. नारायण, निगमायुक्त आनंद वर्धन और यमुना कार्य योजना, जल निगम और करीब आधा दर्जन अन्य विभागों के अधिकारी स्कूली बच्चों और नेशनल कैडेट कोर के युवाओं के साथ इस स्वच्छता कार्यक्रम में शामिल हुए और नदी किनारे से पॉलीथीन की थैलियां समेटीं।

आगरा नगर निगम के 200 सफाईकर्मियों और आगरा वाटर वर्क्‍स के 100 कर्मचारियों ने इस कार्यक्रम में अधिकारियों की मदद की।

कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कुछ स्थानीय निवासियों को उस वक्त हैरानी हुई जब एकत्रित पॉलीथीन थैलियों को नदी के निकट ही खोदे गए एक गड्ढ़े में फेंक दिया गया जबकि जिला अधिकारियों और आगरा की मेयर अंजुला सिंह ने नदी को स्वच्छ रखने की शपथ ली थी।

नदी के पास ही स्थित एक खुली हुई नाली से फैक्ट्रीयों के जहरीले अपशिष्ट पदार्थ सीधे नदी में पहुंच रहे थे लेकिन इस स्वच्छता अभियान में शामिल लोगों का इस ओर ध्यान नहीं गया।

कार्यक्रम स्थल पर मौजूद एक निवासी का कहना था, "क्या इन प्रतीकात्मक संकेतों से नदी स्वच्छ हो जाएगी। ये अधिकारी उन लोगों के खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाते जो नदियों को गंदा करते हैं और अपशिष्ट पदार्थो को नदियों में प्रवाहित कर देते हैं।"

बृज मंडल हैरिटेज कंजरवेशन सोसायटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "इन अधिकारियों से प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है। जिलाधिकारी और निगमायुक्त के पास कुछ नियम हैं जिन्हें लागू करने की आवश्यकता है। जो लोग नदियों में गंदगी डालते हैं उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन का काम स्वयं सेवी संगठनों (एनजीओ) का है ना कि सरकारी एजेंसियों का। सरकारी एजेंसियां इसके लिए कानून का इस्तेमाल कर सकती हैं।"

आंदोलनकारियों का कहना है कि तीन यमुना कार्ययोजनाओं के बावजूद नदी की सेहत पर उनका कोई असर नहीं दिखता है।

पर्यावरणविद हरी दत्त कहते हैं कि कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया था कि करीब 19 नाले नदी में खुलते हैं। जो नदी के पानी को प्रदूषित करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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