बंद कमरों में चर्चा की जगह रैली को महत्व देते थे बसु

बसु के पूर्व चुनाव एजेंट गोकुल बैरागी ने कहा कि माकपा के दिवंगत नेता को खुले मंच से लोगों को संबोधित करना बेहद पसंद था। उन्होंने कहा, "रैली में सैकड़ों लोगों को संबोधित करना हो या फिर गलियों में बैठकें करना हो, बसु को बेहद पसंद था।"

वर्ष 1987, 1991 और 1996 के विधानसभा चुनावों में बसु के चुनाव एजेंट रह चुके बैरागी ने कहा, "चुनावी बाध्यता के कारण बसु को बंद कमरों में भी नेताओं के साथ बैठक करनी पड़ती थी लेकिन उनका मन कहीं और लगता था।"

बैरागी ने कहा कि बसु को क्रोध काफी कम आता था और वह स्थिति को संभालना जानते थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 के विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना के दौरान जब यह पता चला कि बसु गिनती में पिछड़ रहे हैं तो उन्होंने कहा कि इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है, सबकुछ अच्छा ही होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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