सरकार की उदासीनता के बावजूद जीवन संवार रहे हैं विकलांग

शिल्पा रैना

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। विकलांग लोगों का कहना है कि उनके विरोध और ढेरों कानूनों के बावजूद सरकार की उनके प्रति उदासीनता जारी है। पर इन्हीं में से कुछ लोगों ने सरकार की उदासीनता को धता बताते हुए अपनी निशक्तता पर जीत हासिल की है।

दिल्ली निवासी प्रदीप राज कहते हैं, "पिछड़े वर्गो को रोजगार परीक्षाओं की तैयारियों के लिए सरकार की ओर से बहुत सा पैसा दिया जाता है लेकिन हमें कुछ नहीं मिलता।" प्रदीप के दोनों पैर पोलियोग्रस्त हैं।

वह कहते हैं, "इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी चीज की भीख मांग रहे हैं। हम केवल अपने आपको साबित करना चाहते हैं। हम जानते हैं कि हमारे पास योग्यता है लेकिन पैसा नहीं है। इसलिए यह केवल हमारे वजूद को पहचानने की बात है।"

राज बिना किसी सहारे के चलते हैं और वह एक शौकिया टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। वह विकलांग लोगों के एक संगठन के लिए काम करते हैं और अन्य विकलांगों को विभिन्न खेलों में प्रशिक्षित करते हैं। राज उन लोगों के लिए एक आदर्श हैं जो विकलांगता के बाद अपना आत्मविश्वास खो देते हैं।

दूसरे आदर्श नित्यानंद दास हैं। वह एक प्रशिक्षित ओडीसी नर्तक हैं। दास 10 साल पहले एक दुर्घटना में अपना एक पैर गंवा बैठे थे और अब वह केवल एक पैर के साथ ही नृत्य करते हैं।

दास ने भुवनेश्वर से फोन पर आईएएनएस से कहा, "नृत्य हमेशा से मेरा जुनून रहा है। वर्ष 2000 में एक दुर्घटना में अपना पैर गंवाने के बाद मैं तबाह हो गया था लेकिन मैंने इस कमजोरी से लड़ने का निर्णय लिया। इसलिए मैंने 2004 में एक ही पैर पर नृत्य का अभ्यास शुरू किया और 2005 में मंच पर प्रस्तुति दी। उसके बाद मैंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।"

इन लोगों को भारी चुनौतियों के बावजूद अपना उत्कृष्ट करयिर बनाने के लिए 19 जनवरी को मुंबई में 'आईबीएन7 बजाज एलियांज सुपर आइडल्स' समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

मदुरै के 65 वर्षीय जिन्ना ने 13 वर्ष की उम्र में ही अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। बाद में उन्होंने 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड' की स्थापना की। वह इस संगठन के माध्यम से नेत्रहीन लोगों को शिक्षित व प्रशिक्षित कर उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं।

'नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ इम्प्लायमेंट फॉर डिस्एबिल्ड पीपल' (एनसीपीईडीपी) के निदेशक जावेद अबिदी ने आईएएनएस से कहा कि भारत सरकार विकलांग लोगों के प्रति पूरी तरह से असंवेदनशील है।

दिल्ली के रहने वाले अबिदी के शरीर का कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त है। इसके बावजूद वह देशभर में विकलांग लोगों को सशक्त बनाने के लिए जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं।

अबिदी कहते हैं कि देश की आबादी का छह-सात प्रतिशत हिस्सा विकलांग है और राजनेताओं के लिए हम वोट-बैंक नहीं हैं इसलिए हमारी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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