सूर्यग्रहण: लाखों ने देखा खगोल का अद्भुत नजारा (लीड-2)

सूर्यग्रहण सबसे पहले यह तमिलनाडु के कन्याकुमारी में सुबह 11.06 बजे दिखा। सूर्यग्रहण के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)ने पांच रॉकेटों का प्रक्षेपण भी किया जबकि हरिद्वार सहित देश के तमाम धार्मिक स्थलों में मंदिरों के कपाट बंद रहे।

सहस्राब्दी के सबसे लंबा सूर्यग्रहण कुंडलाकार था। दिल्ली में आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखा लेकिन इस दिव्य नजारे को देखने के लिए लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी। यहां सुबह 11.53 बजे से दोपहर बाद 3.11 बजे तक इसे देखा गया। दोपहर 1.39 बजे सबसे अधिक 53 प्रतिशत तक सूर्य ग्रहण देखा गया। नेहरू तारा मंडल में और एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स एसोसिएशन ने लोगों को यह अनोखा नजारा दिखाने की व्यवस्था की थी।

उत्तर प्रदेश के वैज्ञानिक संस्थानों और विद्यालयों में सूर्यग्रहण का नजारा लोगों दिखाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में सूर्यग्रहण दिखाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। लखनऊ में सूर्यग्रहण की शुरुआत सुबह 11.57 पर हुई।

मध्य प्रदेश में भोपाल और उज्जैन में लोगों को सूर्यग्रहण का नजारा दिखाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। भोपाल में क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र ने टेलीस्कोप के जरिए इस खगोलीय घटना को दिखाने का इंतजाम किया था।

हिमाचल प्रदेश में अद्भुत नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग ऐतिहासिक रिज इलाके में इकट्ठा हुए। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी कामराज कैस्थ ने कहा कि ऐतिहासिक रिज इलाके में बड़ी संख्या में लोग सूर्यग्रहण का नजारा देखने के लिए इकट्ठा हुए थे। उड़ीसा, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में भी लोगों ने सूर्यग्रहण का नजारा देखा।

कुंडलाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं लेकिन चंद्रमा की छाया सूर्य की परिधि की अपेक्षा छोटी होती है। इस प्रकार चंद्रमा से ढका हुआ सूर्य 'वलयाकार' के रूप में नजर आता है और चंद्रमा की छाया के चारों ओर से सूर्य की किरणें निकलती हुई दिखाई देती हैं।

सूर्य ग्रहण के प्रभावों के अध्ययन के लिए इसरो आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा और केरल के थुंबा स्थित केंद्रों से रॉकेटों की एक श्रेणी प्रक्षेपित की गई। ये रॉकेट अपने साथ कुछ यंत्र लेकर गए जो ऊपरी वायुमंडल में भौतिक परिवर्तनों का मापन करेंगे। इसरो के परियोजना निदेशक पी.रत्नाकर रॉव ने आईएएनएस को बताया कि शुक्रवार को दोपहर एक बजे से लेकर तीन बजे तक पांच रॉकेट प्रक्षेपित किया गया।

इन रॉकेटों से सूर्य ग्रहण से जुड़े विभिन्न वायुमंडलीय और आयनमंडलीय मानकों का मापन किया जाएगा। थुंबा इक्वाटोरियल रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र (टीईआरएलएस) से रोहिणी रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया। इसरो रोहिणी रॉकेट (आरएच 560 एमके 2) को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। शनिवार को भी दोपहर एक से दो बजे के बीच रॉकेट का प्रक्षेपण किया जाएगा।

उधर, हरिद्वार में शुक्रवार को सूर्यग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के द्वार बंद रखे गए। हरिद्वार के स्थानीय पुजारियों के अनुसार ऐसा सूर्यग्रहण के प्रतिकूल प्रभावों के मद्देनजर किया गया। महाकुंभ की मेजबानी कर रहे इस धार्मिक शहर में सूर्यग्रहण के दौरान पवित्र गंगा नदी में स्नान भी प्रभावित होगा। इसके अलावा भी देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों के कपाट बंद रखे गए थे।

उल्लेखनीय है कि सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और इसकी छाया सूर्य पर पड़ती है, जिसकी वजह से सूर्य आंशिक अथवा पूरी तरह ढक जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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