देशभर में अलग-अलग तरह से मनाया गया फसलों का त्योहार

नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक त्योहारों मकर संक्रांति, पोंगल और भोगाली बिहू के माध्यम से देशभर में गुरुवार को नई फसल का स्वागत किया गया। जबकि भारतीय कैलेंडर के मुताबिक शरद ऋतु की समाप्ति के प्रतीक के रूप में हजारों श्रद्धालुओं ने हरिद्वार से गंगा सागर तक पवित्र गंगा नदी में डुबकियां लगाईं।

महा कुंभ की शुरुआत पर हरिद्वार में इकट्ठे हुए लाखों श्रद्धालुओं ने गुरुवार को पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाई।

इसी दिन पश्चिम बंगाल को एक हादसे का सामना करना पड़ा। गंगा नदी के उद्गम स्थल गंगा सागर के नजदीक हुई भगदड़ में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि नौ अन्य लोग घायल हो गए।

हजारों श्रद्धालु गंगा के उद्गम स्थल पर इस दिन के स्नान को शुभ मानते हैं और वे यहां स्थित मंदिर में प्रार्थना भी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि वैदिक ऋषि कपिल यहां ध्यान साधना करते थे।

उत्तर भारत में इस त्योहार को मकर संक्रांति, असम में भोगाली बिहू और तमिलनाडु में पोंगल कहा जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर में परिवर्तन का प्रतीक है।

उत्तर भारत में इस दिन गुड़, तिल और चिवड़ा से पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। इस दिन दही और खिचड़ी (नए चावल से तैयार) खाने की भी परंपरा है।

इस अवसर पर पतंगबाजी की भी परंपरा है। गुजरात में इसे उत्तरायण की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है जहां हजारों लोग छतों पर इकट्ठे होकर पतंग उड़ाते हैं।

तमिलनाडु में चार दिन तक पोंगल पर्व मनाया जाता है। हर दिन सुबह घरों के सामने रंगोली बनाई जाती है और पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं व विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं।

भोगाली बिहू असम में फसलों के मौसम की समाप्ति का प्रतीक है। उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में नया चावल पकाकर यह पर्व मनाया जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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