मकर संक्रांति के अवसर पर दिखा संस्कृतियों का अद्भुत समागम (राउंडअप)
हरिद्वार में महाकुंभ की शुरुआत भी मकर संक्रांति के ही दिन हुई। देश और दुनिया से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने 'जय गंगा मैया' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे भी लगाए। मकर संक्रांति के दिन से शुरू हुआ स्नान का यह सिलसिला 15 जनवरी को मौनी अमावस्या तक भी चलता रहेगा। हरिद्वार में कुंभ मेला हर 12 साल में लगता है।
श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाने के साथ यहां सूर्य और भगवान शिव की पूजा की। स्नान करने वालों में ज्यादातर आम श्रद्धालु थे। साधु-संत आगामी 20 जनवरी से स्नान करेंगे। वे फिलहाल ज्वालापुर के 'अखाड़ों' में रह रहे हैं।
यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। त्वरित कार्रवाई बल, दंगा निरोधी दस्ता, राज्य पुलिस और सेना के जवानों की विभिन्न स्थानों पर तैनाती की गई है।
उल्लेखनीय है कि हिंदू धर्म के अनुसार देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध के दौरान 'अमृत कलश' से अमृत की कुछ बूंदें हरिद्वार में भी गिरी थीं। धार्मिक मान्यता है कि 'अमृत कलश' समुद्र मंथन के दौरान निकला था।
उत्तरायण पर्व के अवसर पर गुजरात के अन्य शहरों की तरह ही अहमदाबाद के आकाश में भी दिनभर उड़ान भरती रंग-बिरंगी पतंगे नजर आईं। यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
गुजरात में इस पर्व का मुख्य आकर्षण पतंगबाजी है। यहां पर्व के मुख्य दिन से एक सप्ताह पहले ही पतंगबाजी शुरू हो जाती है।
बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा सहित कई नदियों में लाखों लोगों ने डूबकी लगाई। पटना में गंगा स्नान के लिए लोग बुधवार से ही जुटने लगे थे। गंगा के विभिन्न घाटों पर ठंड के बावजूद सुबह में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने और गंगा तट पर दान करने से सारे पाप कट जाते हैं।
बिहार के बक्सर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया सहित सभी स्थानों में हर्षोल्लास से मकर संक्रांति मनाया जा रहा है। राज्य में इस दिन चूड़ा-दही तथा तिलकुट खाने की भी परंपरा है। इस दिन तिल खाने को भी शुभ माना जाता है।
इलाहाबाद में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम तट पर चल रहे विश्व प्रसिद्ध माघ मेले में मकर संक्रांति के मौके पर पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। तड़के चार बजे से ही संगम पर श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। देश के हर कोने से श्रद्धालु संगम स्नान के लिए पहुंचे।
हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन पवित्र संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसीलिए आज का दिन संगम स्नान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मेला 12 फरवरी तक चलेगा।
उधर, आंध्र प्रदेश में सुबह से ही शहर और गांव मकर संक्रांति पर्व के रंग में रंग गए थे। तेलुगू लोगों ने रंग-बिरंगी पतंगों, रंगोली, सजे-धजे सांडों व मुर्गो की लड़ाई के साथ इस पर्व को मनाया। महिलाओं ने तड़के ही घरों के आगे फूलों और गाय के गोबर से रंगोली बनाकर पर्व के आयोजनों की शुरुआत कर दी थी। घरों को आम की पत्तियों और गेंदे के फूलों से सजाया गया था।
इस अवसर पर खेती में बैलों के योगदान के लिए उनकी पूजा की गई। महिलाओं ने विशेष व्यंजन 'चक्कारा पोंगल' बनाया। यह नए चावल, गुड़ और दूध से बना व्यंजन होता है।
चेन्नई में आज के दिन फसलों का त्योहार पोंगल पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। चार दिन तक चलने वाले इस पर्व में बारिश, सूर्य, खेत और जानवर सभी का महत्व होता है। यह त्यौहार तमिलनाडु की छोटी दीवाली जैसा ही है लेकिन इसमें आतिशबाजी नहीं होती।
राज्यभर के लोग अपने इस विशेष पर्व के लिए सुबह तड़के ही नए कपड़े पहनकर तैयार होकर मंदिरों में विशेष प्रार्थना के लिए पहुंचे। इस अवसर पर पारंपरिक व्यंजन तैयार कर रहे लोगों के घरों के बाहर घी और तले हुए काजू की सुगंध बिखरी हुई थी। इस पर्व का विशेष व्यंजन चाकारी पोंगल है, जिसे दूध में चावल, गुड़ और बांग्ला चना को उबालकर बनाया जाता है।
मध्य प्रदेश में मकर संक्रांति के अवसर पर नर्मदा, बेतवा, क्षिप्रा सहित अन्य नदियों के तटों पर विशेष स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्घालु पहुंचे। रेलवे ने जहां श्रद्धालुओं के लिए विशेष 'मेला ट्रेन' चलाई है वहीं स्नान के दौरान कोई हादसा न हो इसके लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
असम में आज से फसलों का त्योहार भोगाली बिहू शुरू हो गया। यहां पक्षियों की लड़ाई के साथ इस पर्व की शुरुआत हुई। करीब 400 पक्षी अपने मालिकों के साथ इसमें शामिल हुए। विजेता के लिए एक ट्रॉफी और 2,001 रुपये का पुरस्कार रखा गया है।
गुवाहाटी से 30 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में सुबह से ही पक्षियों का शोरगुल शुरू हो गया था। अपने मालिकों और हजारों दर्शकों की उपस्थिति में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच करीब 400 बुलबुलें एक-दूसरे से झगड़ रही थीं।
असम में पक्षियों की लड़ाई बिहू के आयोजन का अभिन्न हिस्सा है। हाजो के स्थानीय लोग बहुत पहले से ही इस वार्षिक समारोह की तैयारियां शुरू कर देते हैं। इस अवसर पर घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनते हैं।
उधर, पश्चिम बंगाल में दक्षिणी 24 परगना जिले के प्रसिद्ध गंगासागर मेले में भगदड़ मच गई, जिसमें सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए। राज्य सरकार ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
मकर संक्राति के दिन यह भगदड़ उस समय मची जब श्रद्धालु एक नौका पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। मृतकों में छह महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल है।
दक्षिणी 24 परगना के जिला अधिकारी खलील अहमद ने बताया, "यह हादसा सुबह 4.30 से पांच बजे के बीच हुआ। नौका पर सवार होने की अफरातफरी में श्रद्धालुओं ने बैरिकेड तोड़ दिए। हम श्रद्धालुओं के हर समूह को सलाह देते हैं वे महिलाओं और बच्चों को बीच में रखें। परंतु यहां ऐसा नहीं किया गया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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