मैं विवादास्पद रिपोर्टिग का शिकार : थरूर
वैश्विक मामलों की भारतीय परिषद (आईसीडब्ल्यूए) में लार्ड भीखू पारेख की किताब के विमोचन के बाद थरूर ने शनिवार शाम को कहा था कि नेहरु की विदेश नीति जहां देश को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में नई ऊंचाई तक ले गई वहीं वह आलोचकों की इस बात से भी सहमत हैं कि उनकी नीति के कारण देश की छवि अन्य देशों के आचरण पर नैतिक टिप्पणी करने वाले राष्ट्र के रूप में बन गई।
कांग्रेस प्रवक्ता ने थरूर के इस बयान की आलोचना की थी।
अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देते हुए थरूर ने कहा, "मैं लार्ड भीखू पारेख की किताब के मुख्य अंशों को समायोजित कर रहा था। मैंने कहा कि हमारी विदेश नीति का विकास हमारी सभ्यता और सभ्यता की अभिव्यक्ति में महात्मा गांधी और नेहरूके अत्यधिक योगदान से हुआ है।"
उन्होंने कहा, "दोनों ने दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया लेकिन दुनिया के मामलों पर नैतिक टिप्पणी करके एक नकारात्मक छवि भी अर्जित की, जो आपके भाषण से बहुत स्पष्ट तरीके से सामने आता है। यह अध्यक्ष के रूप में पेश एक सारांश था जिसे वक्ताओं द्वारा की गई टिप्पणी समझा जा रहा है।"
थरूर ने मीडिया को रिपोर्टिग में अधिक सजग और प्रासंगिक होने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया। अपर्याप्त रिपोर्टिग से मुझे पीड़ा हुई।"
उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक मामलों से जुड़े एक गंभीर देश के रूप में देखा जाना चाहिए, इसमें विचारों की दुनिया भी शामिल है। थरूर ने कहा कि आईसीडब्ल्यू जैसे संस्थानों में भारतीय विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं पर बिना खुली चर्चा के ऐसे संस्थानों की स्थापना के उद्देश्य को क्षति पहुंचेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications