श्रीलंका का वीडियो सही: संयुक्त राष्ट्र

जाँचकर्ता फ़िलिप एल्सटन ने कहा है कि तीन स्वतंत्र विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि की है कि वीडियो प्रामाणिक है और उन्होंने युद्धापराध की जाँच की मांग को दोहराया है. इस वीडियो में यह भी दिखाया गया था कि कुछ शव ज़मीन पर पड़े हुए हैं.
दावा किया गया था कि इसे 2009 में जनवरी के महीने में फ़िल्माया गया था, जब श्रीलंका के सैनिकों और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्ध अंतिम चरण में था. श्रीलंका सरकार ने अपनी एक जाँच के बाद कहा था कि ये वीडियो झूठा है.
जाँच
लेकिन ग़ैर-क़ानूनी ढंग से हुई मौतों के मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि फ़िलिप एल्सटन ने पत्रकारों से कहा, "नतीजे साफ़ बताते हैं कि वीडियो प्रामाणिक है." उन्होंने इस वीडियो की जाँच करने वाले तीनों अमरीकी विशेषज्ञों का परिचय भी सार्वजनिक रुप से दिया है.
लेकिन साथ में उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में कुछ ऐसी चीज़े थीं जिसकी व्याख्या विशेषज्ञ नहीं कर सके. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ ने कहा कि श्रीलंका की सरकार को एक स्वतंत्र जाँच करवानी चाहिए जिससे कि ज़ाहिर हो सके कि युद्ध के दौरान दोनों पक्षों ने किस तरह के युद्धापराध किए.
इस वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता था कि इसका फ़िल्मांकन कहाँ किया गया है. बीबीसी और दूसरे मीडिया संस्थानों को 'जर्नलिस्ट फॉर डेमोक्रेसी' नाम की एक संस्था ने यह वीडियो उपलब्ध करवाया था. उन्होंने कहा था, "वीडियो से युद्ध के दौरान सरकारी फौजों के व्यवहार की असलियत दिखाता है."
उल्लेखनीय है कि लंबे संघर्ष के बाद पिछले साल मई में सरकारी फ़ौज ने तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ जीत की घोषणा की थी.इस संघर्ष में तमिल टाइगर्स ऑफ़ तमिल इलम (लिट्टे) के प्रमुख वी प्रभाकरण की मौत हो गई थी. संघर्ष की वजह से लाखों तमिलों को विस्थापित होना पड़ा था और तमिलों की हालत को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए थे.












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