एक्स-किरणों की जगह ले सकती हैं टी-किरणें
टेक्सास की 'ए एंड एम यूनीवर्सिर्टी' के प्रोफेसर एलेक्से बेलयानिन ने 'टेराहट्र्ज' पर अध्ययन किया है। इन किरणों को टीएचजेड या टी-किरणें भी कह सकते हैं। बेलयानिन के मुताबिक ये किरणें विद्युत-चुम्बकीय वर्णक्रम के सबसे कम विकसित और सबसे कम उपयोग किए जाने वाले भाग का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, "टीएचजेड कैमरे के उपयोग से हम मानव शरीर में छुपे हुए हथियारों या नशीली दवाओं का पता लगा सकते हैं या लिफाफे और डिब्बों के अंदर देख सकते हैं।" उन्होंने कहा कि वस्तुओं के अध्ययन, रसायन, जीव विज्ञान और चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में टीएचजेड विकीरण का उपयोग किया जा सकता है।
बेलयानिन ने कहा, "टीएचजेड विकिरण अपारदर्शी सूखी सामग्रीयों को भेद सकता है। इससे कोई नुकसान नहीं होता और मनुष्यों पर इसका उपयोग किया जा सकता है।"
'राइस यूनीवर्सिटी' और 'नेशनल हाई मैग्नेटिक फील्ड लैब' के सहयोगियों के साथ अध्ययन करने वाले बेलयानिन का कहना है कि टी-किरणें माइक्रोवेव विकिरण और अवरक्त (ऊष्मा) विकिरणों के बीच पाई जाती हैं। एक्स-किरणों की अपेक्षा अधिक गहराई तक भेदने के बावजूद ये किरणें शरीर पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं छोड़ती हैं।
'नेचर फीजिक्स' पत्रिका में इस अध्ययन के परिणाम प्रकाशित हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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