हिरासत के दौरान कोई वार्ता नहीं हुई : राजखोवा
गुवाहाटी, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रतिबंधित संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा) के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा ने गुरुवार को कहा है कि शांति वार्ता अब भी पहले की तरह ठप है। राजखोवा ने इस बात से साफ इंकार किया कि पिछले 12 दिनों से पुलिस हिरासत में रहने के दौरान सरकार से उसकी कोई वार्ता हुई है।
गुवाहाटी सेंट्रल जेल में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की विशेष अदालत में पेशी के लिए ले जाने के दौरान राजखोवा ने ये बातें अपने छोटे भाई अजय राजकुंवर से कही। सुरक्षा कारणों से इस मामले की सुनवाई सीजेएम की अदालत के बजाय जेल के भीतर की गई।
जांच अधिकारियों द्वारा गुवाहाटी बम विस्फोट से जुड़े तीन अन्य मामलों में आरोप तय किए जाने के बाद अदालत ने गुरुवार को राजखोवा और उल्फा के उप कमांडर राजू बरुआ को और नौ दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।
राजखोवा और बरुआ के वकील बिजोन महाजन ने कहा, "जांचकर्ताओं ने 12 दिन की पुलिस हिरासत की मांग की थी लेकिन अदालत ने नौ दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की है।
राजकुंवर ने जेल परिसर बाहर निकलने के तुरंत बाद आईएएनएस से कहा, "अरविंद राजखोवा ने यह स्पष्ट किया है पिछले 12 दिनों में पुलिस हिरासत के दौरान शांति वार्ता के मुद्दे पर कोई प्रगति नहीं हुई है। इस संबंध में सरकार और उनके बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।"
राजखोवा ने हालांकि कहा कि उल्फा सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है।
राजकुंवर ने कहा, "अपने पक्ष को लेकर मेरे भाई ने स्पष्ट किया है कि उल्फा सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है लेकिन इस तरह की कोई भी वार्ता संप्रभुता की उनकी मुख्य मांग पर केंद्रित होनी चाहिए।"
राजखोवा, बरुआ और राजखोवा के निजी सुरक्षाकर्मी सशा चौधरी ने पिछले दिनों मेघालय में डॉकी चौकी के पास भारतीय अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
उल्फा प्रमुख ने हालांकि बाद में आत्मसमर्पण करने की बात से इंकार करते हुए कहा था कि उन्हें गिरफ्तार किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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