बोधगया में मठ संचालित करेगा मंगोलिया

नई दिल्ली, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। बिहार के गया जिले में स्थित बोधगया जल्द ही एक और कारण से जाना जाएगा। इस ऐतिहासिक बौद्ध तीर्थस्थल में भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। इस तीर्थ स्थल की ख्याति है कि यहां बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

इतिहास प्रसिद्ध योद्धा चंगेज खान का देश मंगोलिया अब बिहार के बोधगया में एक बौद्ध मठ का संचालन करेगा। इस मध्य एशियाई देश के राजदूत वोरोशिलोव इंकबोल्ड के अनुसार मठ अगले साल तक बनकर तैयार हो जाएगा। मठ मंगोलिया और भारत सरकार के संयुक्त प्रयास से बनाया जा रहा है।

आईएएनएस को एक साक्षात्कार में वोरोशिलोव इंकबोल्ड ने बताया कि बुद्ध को हम भारत की तपोस्थली के रूप में देखते हैं इसलिए भारत सभी मंगोलों के दिलों के बहुत करीब है। मंगोलिया में आज बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है।

उन्होंने बताया कि मंगोलिया से तीर्थयात्री हमेशा से भारत आते रहे हैं और अब अगले साल तक बोधगया में बन कर तैयार हो जाने वाला यह मठ बड़ी संख्या में मंगोलियाई सैलानियों को अपनी ओर खींचेगा।

मंगोलियाई राजदूत ने बताया कि जनवरी 2004 में भारत और मंगोलिया सरकार के बीच बोधगया में मंगोलियाई मठ के लिए एक समझौता हुआ था। बीच में स्थानीय प्रशासन की ओर से कुछ आपत्तियां आई थीं पर अब सब कुछ योजनानुसार ही चल रहा है और मठ अगले वर्ष के मध्य तक बन जाएगा।

भारत बड़ी संख्या में मंगोलियाई सैलानियों के प्रिय गंतव्यों में एक रहा है और इस मठ के कारण आज इनकी संख्या और भी अधिक हो गई है। मंगोलियाई राजदूत के अनुसार 2009 में 2000 से अधिक लोगों ने भारत की यात्रा की।

इंकबोल्ड ने बताया कि हमारा देश मंगोलिया 30 लाख से भी कम आबादी वाला एक छोटा सा देश है और इसका क्षेत्रफल भारत के आधे से भी कम है। इसको ध्यान में रखें तो सैलानियों की यह संख्या कम नहीं है।

उनके अनुसार तीर्थ यात्रियों के बाद अब एक और कारण मंगोलों के पास भारत आने का है। यह कारण है - मेडिकल टूरिज्म। आज मंगोलिया से अनेक लोग अपनी आंखों की सर्जरी कराने और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए भारत आ रहे हैं। इसलिए यह क्षेत्र भी संभावनाओं से भरपूर है।

गंगा नदी भारत की तरह मंगोलिया में भी एक पवित्र नदी मानी जाती है और इसका कुछ पानी संजो कर ले जाने के लिए भी लोग भारत आते रहे हैं। सिर्फ यही नहीं, मंगोलिया में अनेक गाने हैं जो गंगा नदी पर बने हैं।

मंगोलियाई राजदूत ने यह भी याद दिलाया कि भारत से मंगोलिया जाने वाले लोगों की संख्या अब भी बहुत कम है और इसलिए पर्यटन को बढ़ावा देने वाली अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली में चल रहा ग्रान्ड चंगेजखान गोल्फ कप टूर्नामेंट इसी क्रम में एक प्रयास है। मंगोलियाई दूतावास ने पिछले वर्ष 1500 भारतीयों को वीजा जारी किए थे। इनमें व्यापारी और राजनयिकों की संख्या भी शामिल है। सिर्फ 600-700 वीजा ही सैलानियों के थे।

पहली बार है कि यह टूर्नामेंट मंगोलिया के बाहर आयोजित किया जा रहा है।

आईटी, बॉयोटैक्नोलॉजी और शिक्षा आदि अन्य ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देश सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

भारतीय कॉरपोरेट घराने जैसे जिंदल स्टील और मेस्को स्टील लिमिटेड मंगोलिया में अपनी इकाइयां खोल चुकी हैं। खनन एक और नया क्षेत्र है जिसमें दोनों देश सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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