कोपेनहेगेन बैठक में हिस्सा लेंगे मनमोहन

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर शुरू हो रही कोपेनहेगेन बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी हिस्सा लेगें. ये सम्मेलन 7 दिसंबर से शुरू हो रहा है. लेकिन मनमोहन सिंह 17 दिसंबर को वहाँ जाएँगे.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कोपेनहेगेन सम्मेलन में हिस्सा लेना का फ़ैसला अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी के आग्रह के बाद आया है.
पिछले हफ़्ते मनमोहन सिंह से मुलाक़ात के दौरान राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनसे सम्मेलन में हिस्सा लेने का आग्रह किया था.
उसके बाद पोर्ट ऑफ़ स्पेन में मुलाकात के दौरान निकोला सार्कोज़ी ने भी मनमोहन सिंह से अनुरोध किया था कि वो कोपेनहेगेन बैठक में हिस्सा लें.
उधर कोपेनहेगेन बैठक पर व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कई महीनों के कूटनीतिक प्रयासों के बाद अब प्रगति दिखने लगी है.
बयान के मुताबिक़ राष्ट्रपति ओबामा के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों और अमरीका की ओर से कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर लक्ष्य निर्धारण के बाद चीन और भारत जैसे देशों ने पहली बार कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं.
लक्ष्य
भारत का कहना रहा है कि उसका प्रतिव्यक्ति कार्बन उत्सर्जन विकसित देशों के मुक़ाबले बेहद कम है और वो क़ानूनी रूप से लागू कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य निर्धारण को स्वीकार नहीं करेगा.
भारत किसी भी लक्ष्य निर्धारण से भी मना करता रहा है. कोपेनहेगेन बैठक से ठीक पहले अब भारत की ओर से 20-25 प्रतिशत कटौती के लक्ष्य की बात कही गई है.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर डेनमार्क के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर भी प्रगति हुई है.
बयान के मुताबिक़ राष्ट्रपति ओबामा की बातचीत विकसित देशों के कई नेताओं से हुई है जिसमें इस बात पर सहमति हुई कि वर्ष 2012 तक हर साल 10 अरब डॉलर इकट्ठा करना कोपेनहेगेन समझौते का प्रमुख हिस्सा होना चाहिए.
इसका मकसद ये है कि विकासशील देशों, खासकर पिछड़े देशों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने की परियोजनाओं और उसके असर को घटाने पर पैसा ख़र्च किया जा सके.
आलोचना
दूसरी ओर संस्था सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट या सीएसई का कहना है कि एक तरफ़ अमरीका को जहाँ 40 फ़ीसदी तक की कटौती करनी चाहिए थी, उसने वर्ष 1990 के स्तर से मात्र तीन प्रतिशत की कटौती की बात की है.
सीएसई ने कहा है कि व्हाइट हाउस के बयान से स्पष्ट है कि भारत की ओर से कार्बन उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य की घोषणा अमरीका के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठकों और महीनों चली कूटनीतिक वार्ताओं के बाद की गई है.
सीएसई का कहना है कि डेनमार्क की ओर से लाए गए प्रस्ताव में विकसित और विकासशील देशों के बीच के फ़र्क को खत्म कर दिया गया है यानी कार्बन उत्सर्जन के लिए मूल रूप से ज़िम्मेदार रहे विकसित देश अपनी ज़िम्मेदारी से बच जाएंगे.
सीएसई के मुताबिक़ कोपेनहेगेन में अगर समझौता होता है तो वो एक 'ख़राब समझौता' होगा.












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