उल्फा प्रमुख राजखोवा का नाटकीय अंदाज में आत्मसमर्पण (राउंडअप)

गुवाहाटी, 4 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रतिबंधित संगठन, युनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के अध्यक्ष तथा देश के अति वांछित भगोड़ा अरविंद राजखोवा ने 30 वर्षो तक भूमिगत रहने के बाद अंतत: शुक्रवार को आत्मसमर्पण कर दिया।

शुक्रवार तड़के राजखोवा और उसके निजी सुरक्षाकर्मी राजा बोरा और उप प्रमुख राजू बरुआ ने आठ अन्य विद्रोहियों तथा अपने परिवारों सहित मेघालय के दावकी इलाके में भारतीय अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण करने वालों में राजखोवा और उसकी पत्नी कावेरी व दो बच्चे, राजू बरुआ और उसकी पत्नी व बच्चे, राजखोवा का निजी सुरक्षाकर्मी राजा बोरा एवं उल्फा के स्वयंभू विदेश सचिव साशा चौधरी की पत्नी व उनका पुत्र शामिल हैं। साशा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

आत्मसमर्पण करने वाले उल्फा नेताओं और उनके परिवार को एक हेलीकॉप्टर के जरिए गुवाहाटी लाया गया। इन लोगों को असम पुलिस की चौथी बटालियन के मुख्यालय में रखा गया है।

राजखोवा, बरुआ और राजा बोरा को औपचारिक रूप से असम पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि उल्फा नेताओं की पत्नियों और बच्चों को गिरफ्तार नहीं किया गया है और उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

गुवाहाटी के एक वरिष्ठ वकील बिजन महाजन ने कहा, "अरविंद राजखोवा और राजू बरुआ के परिजनों ने कानूनी मदद के लिए हमसे संपर्क किया है और हम उन्हें कानूनी मदद मुहैया करा रहे हैं।"

गिरफ्तार तीनों उल्फा नेताओं को शुक्रवार को देर शाम या शनिवार को अदालत में पेश किया जा सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण की यह घटना सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की दावकी चौकी पर शुक्रवार सुबह करीब छह बजे घटी। बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "राजखोवा और अन्य ने बीएसएफ कमांडरों से संपर्क किया। उनका कहना था कि वे उल्फा से हैं और आत्मसमर्पण करना चाहते हैं।"

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने शुक्रवार को कहा, "मै इस घटना से खुश हूं और उम्मीद रखता हूं कि वे अब शांति वार्ता में शामिल होंगे।"

उच्च पदस्थ खुफिया सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण का यह नाटकीय घटनाक्रम उल्फा नेताओं और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई शुरुआती बातचीत के बाद हुआ है। कहा जा रहा है कि पिछले दो दिनों में उल्फा की ओर से संप्रभुता की मांग पर राजखोवा के अड़े होने के कारण सरकार के साथ वार्ता असफल रही।

इसके पहले की खबरों में कहा गया था कि राजखोवा को बांग्लादेश की पुलिस ने गिरफ्तार कर भारतीय अधिकारियों के हवाले किया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, "चूंकि उल्फा नेता अपनी मुख्य मांग को लेकर बातचीत करना चाहते थे, लिहाजा उन्हें आत्मसर्मण करते हुए दिखाने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था।"

यहां तक कि गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने भी बुधवार को संसद में कहा था कि अगले कुछ दिनों में उल्फा की ओर से बातचीत संबंधी कोई राजनीतिक बयान आने वाला है।

दूसरी ओर उल्फा के कमांडर इन चीफ परेश बरुआ ने शुक्रवार को स्थानीय मीडिया को भेजे एक ईमेल में कहा है, "संप्रभुता की हमारी मांग के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और हम मांग करते हैं कि अरबिंद राजखोवा अपने आत्मसमर्पण के पूरे घटनाक्रम पर अपना रुख साफ करें।"

उल्फा के उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई ने यहां एक स्थानीय अदालत में पेशी के दौरान पत्रकारों से कहा, "हम बातचीत को तैयार हैं, बशर्ते कि केंद्र सरकार हमारी संप्रभुता की मांग पर सहमत हो।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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