ब्रिटेन में भारतीय छात्रों की दुर्दशा

Gurdwara
इंग्लैंड में पढ़ाई करने आए कई भारतीय छात्र दोपहर में मुफ़्त भोजन खाने के लिए साउथहॉल के एक गुरुद्वारे में आते हैं क्योंकि हालात इतने ख़राब हैं कि वे पैसे देकर खाना नहीं खरीद सकते.

पर ये वो दुनिया तो कतई नहीं है जिसका सपना उन्हें दिखाया गया था. नितिन वालिया कुछ दिन पहले ही छात्र वीज़ा लेकर इंग्लैंड आए हैं और गुरुद्वारे में शरण ली है. वे कहते हैं, "मैं कमरे का किराया नहीं दे सकता. मैं घर में अपने रिश्तेदारों से पैसे उधार ले रहा हूँ ताकि कॉलेज जाने के लिए बस का भाड़ा दे सकूँ."

एजेंटों के हाथों ठगे जाने की उनकी कहानी उसी कमरे में मौजूद कई लोगों की कहानी से अलग नहीं है. ये एजेंट छात्रों से पैसे लेते हैं ताकि उन्हें कॉलेज में दाखिला दिला सकें. रवि सिंह ने अक्तूबर में बिज़नेस मैनेजमेंट का कोर्स शुरु किया है. वे बताते हैं, "भारत में एजेंट कहते हैं कि ब्रिटेन में हमें पार्ट-टाइम काम मिल जाएगा ताकि हम अपनी पढ़ाई के लिए पैसा जुटा सकें. लेकिन हकीकत कुछ और ही है. कहीं कोई नौकरी नहीं है."

छात्रों की बढ़ती संख्या

साउथहॉल में दो गुरुद्वारों के अध्यक्ष दीदार सिंह रंधावा मानते हैं कि विश्व में आर्थिक मंदी और ब्रिटेन आने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण हालात बदल गए हैं. वे कहते हैं, "बहुत से छात्र हमारे यहाँ खाना खाने आते हैं. हमें खाना देने में कोई समस्या नहीं है. लेकिन वो रहने की जगह भी माँगते हैं. दो-चार दिन तो ठीक है लेकिन हम इन्हें हमेशा के लिए नहीं रख सकते."

सूचना के अधिकार के तहत पता चला है कि जून और अगस्त के बीच मुंबई, नई दिल्ली और ढाका में ब्रिटिश हाई कमिशन ने 19950 छात्र वीज़ा जारी किए. बीबीसी के एक कार्यक्रम के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में जब से अंक-आधारित आप्रवासन प्रणाली शुरु हुई है तब से भारत और बांग्लादेश से तीन गुना ज़्यादा वीज़ा दिए गए हैं.

छात्र वीज़ा मिलने के लिए एक शर्त ये है कि आपको ये साबित करना होगा कि ब्रिटेन में रहने के लिए आपके पास पर्याप्त पैसे हैं. लंदन में आप्रवासन मामलों में सलाह देने और अपील सेवा में निदेशक हरजाप सिहं कहते हैं कि कुछ लोग इस प्रावधान की ख़ामियों का फ़ायदा उठाते हैं.

वे बताते हैं, "अक्तूबर से पहले आवेदनकर्ता को केवल ये साबित करना होता था कि अर्ज़ी दाखिल करने से एक पहले उसके खाते में पर्याप्त पैसे हैं. तकनीकी रूप से देखा जाए तो कोई भी व्यक्ति पैसे उधार माँग सकता था, सोमवार को पैसा खाते में डाला और मंगलवार को वीज़ा की अर्ज़ी दे सकता था. अब ये ज़रूरी हो गया है कि अर्ज़ी दाखिल करने के लिए 28 दिन पहले आपके खाते में पैसे होने चाहिए. पर इससे आवेदकों पर असर नहीं पड़ा है."

हरजाप सिंह कहते हैं, नए प्रावधान के बाद वीज़ा आवेदकों की संख्या बढ़ी है इसमें वो छात्र शामिल हैं जिनके पास पैसे नहीं हैं और वो भी जिन्हें वीज़ा चाहिए ताकि वे ब्रिटेन आकर नौकर ढूँढ सकें. विदेशी छात्र एक हफ़्ते में 20 घंटे तक काम कर सकते हैं.

कहाँ से लाएँ पैसे

21 वर्षीय छात्र नितिन कहते हैं कि अगर उन्हें हालात का पता होता तो वो पंजाब से कभी नहीं आते. उन्होंने वीज़ा के लिए एक एजेंट को करीब 600 पाउंड दिए. कॉलेज और विमान सफ़र के लिए 2480 पाउंड दिए. ये खर्चा निकालने के लिए नीतिन के माँ-बाप ने अपने जीवन की पूरी पूँजी लगा दी और रिश्तेदारों से भी पैसे माँगने पड़े.

वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि मेरे साथ धोखा किया गया है. इंटरनेट पर देखा तो कॉलेज का परिसर था लेकिन जब मैं आया तो छोटी सी इमारत थी. भारत में इससे बढ़िया कॉलेज मिल जाते." पर उन्होंने क्यों एजेंट की हर बात पर बिना जाँचे-परखे विश्वास किया तो वे कहते हैं, "हर कोई विदेश में जाकर पढ़ाई करने को लेकर उत्साहित रहता है. ये कोई नहीं सोचता कि वहाँ जाकर हमें कुछ मिलेगा भी या नहीं."

कुछ दिन पहले साउथहॉल में श्री गुरु सिंह सभा ने छात्रों की मदद करने के लिए एक टेलीफ़ोन हेल्पलाइन सेवा शुरु की है. अध्यक्ष दीदार सिंह रंधावा बताते हैं कि कई छात्र उन्हें भारत भेजने की गुहार कर रहे हैं लेकिन उन्हें पास इतने संसंधान नहीं है. दीदार सिंह रंधावा ने भारत के राज्य पंजाब में स्थानीय मीडिया में संदेश भिजवाएँ हैं जिसमें कहा गया है कि ब्रिटेन आने से पहले छात्र अपने रहने और पैसों का इंतज़ाम करें.

नितिन गुरुद्वारे में एक या दो दिन और रह सकते हैं. वे कहते हैं, "मैं कमरे का किराया तभी दे सकता हूँ अगर मुझे नौकरी मिलती है. अगर नौकरी नहीं मिलती तो मैं भारत चला जाऊँगा. लेकिन ये बहुत शर्मनाक बात होगी. मुझे नहीं पता कि जो पैसा मैने उधार लिया है वो मैं कैसे चुकाऊँगा."

( छात्रों की पहचान न ज़ाहिर करने के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं)

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