भोपाल गैस कांड: आरोपी पकड़ से अब भी बाहर

Bhopal Gas Tragedy
नई दिल्ली। भोपाल में दुनिया की सबसे त्रासद औद्योगिक दुर्घटना के 25 वर्षो बाद भी भारत इसके लिए जिम्मेदार मुख्य आरोपी अमेरिकी नागरिक वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण में सफल नहीं हो पाया है।

अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने इस वर्ष जुलाई में एक नया वारंट जारी किया और मामले को अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक अश्विनी कुमार ने बताया, "मुकदमे का सामना करने के लिए एंडरसन कभी भी अदालत के सामने पेश नहीं हुआ। उसके प्रत्यर्पण के लिए 23 सितम्बर 1993 को विदेश मंत्रालय को एक अनुरोध भेजा गया। मामले पर पुनर्विचार के आग्रह के साथ अमेरिका से यह नौ मई 2002 को वापस आ गया।"

कुमार ने बताया कि एंडरसन के खिलाफ नौ जुलाई 2009 को एक नया गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। उसके मुकदमे को अन्य आरोपियों से अलग किया गया है। एंडरसन के प्रत्यर्पण का मामला अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाया गया है।

पच्‍चीस हजार मौतें हुई

भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने से दो दिसम्बर 1984 की रात जहरीली मिथाइल आइसोनेट गैस के रिसाव की दुर्घटना के समय एंडरसन यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन (यूसीसी) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी था। इस दुर्घटना में तत्काल 3,500 लोगों की मौत हुई थी।

दुर्घटना के प्रभाव से हजारों लोग बीमार और विकलांग हुए। स्वयंसेवी संगठनों के अनुसार दुर्घटना के 72 घंटों के भीतर 10,000 लोगों की मौत हुई और अब तक 25,000 लोगों की मौत हो चुकी है।

यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। इसकी 50.9 प्रतिशत हिस्सेदारी यूनियन कार्बाइड के पास और 49.1 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय निवेशकों के पास थी। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान भी शामिल थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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