खनन पर रोक, जनार्दन रेड्डी को झटका

खनन पर रोक, जनार्दन रेड्डी को झटका

उमर फ़ारूक़

बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से

विवादों में घिरे कर्नाटक के खदान मालिक और राज्य पर्यटन मंत्री जनार्धन रेड्डी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है.

आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए उनकी तीन खदानों से कच्चे लोहे के खनन पर रोक लगा दी है. ये खदानें आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में स्थित हैं जो कि कर्नाटक के बेल्लारी ज़िले से सटा हुआ है.

आंध्र सरकार ने यह फैसला उस केंद्रीय अधिकृत समिति की सलाह पर किया है जो उच्चतम न्यायालय ने अनंतपुर ज़िले में अवैध खनन और खदान मालिकों की ओर से कई क़ानूनों के उल्लंघन की शिकायतों का जायज़ा लेने के लिए स्थापित की गई थी.

राज्य सरकार ने कुल मिलाकर छह खदानों से कच्चा लोहा निकलने और पहले ही से निकले हुए माल को वहां से दूसरी जगह ले जाने पर रोक लगा दी है. इनमें से तीन खदानें जनार्धन रेड्डी की दो कंपनियों, ओबुलापुर माइनिंग कंपनी और अनंतपुर माइनिंग कंपनी की हैं जबकि शेष तीन खदानें दूसरी निजी कंपनियों की हैं.

जनार्धन रेड्डी और उनकी कंपनियां गत चार वर्षों से ही विवादों में घिरी हुई थीं जब राज्य के मुख्य विपक्षी दल तेलुगुदेशम और दूसरी पार्टियों ने उनपर अवैध खनन के आरोप लगाए और कहा कि सरकार ने उन्हें जितनी ज़मीन पट्टे पर दी है उससे कहीं ज़्यादा ज़मीन पर वो खुदाई कर रहे हैं और सरकारी खजाने को कई सौ करोड़ रुपए का चूना लगा रहे हैं.

विपक्ष का आरोप

लेकिन अब तक इन आरोपों के आधार पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की. विपक्ष का आरोप था कि सरकार की खामोशी का रहस्य यह था की राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी, जनार्धन रेड्डी के करीबी मित्र थे.

विपक्ष का यह भी आरोप था कि दिवंगत मुख्यमंत्री और उनके परिवार के व्यापारिक हित भी जनार्धन रेड्डी की कंपनियों से जुड़े हुए थे. सच्चाई जो भी रही हो लेकिन जब तक वाईएसआर मुख्यमंत्री थे तब तक सरकार ने जनार्दन के विरुद्ध लगने वाले आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया.

गत सितंबर के महीने में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाईएसआर की मृत्यु के बाद यह पूरा विवाद ज़ोर-शोर से उठा और तेलुगुदेशम के साथ कई दूसरे विपक्षी दलों ने भी जनार्धन रेड्डी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की छानबीन करने की मांग की.

इससे पहले की सीबीआई यह मामला अपने हाथ में लेती, सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर विचार करते हुए एक केंद्रीय अधिकृत समिति गठित की और जाँच के आदेश दे दिए.

समिति ने कहा कि उसने अनंतपुर में अवैध खनन के आरोपों को सही पाया है और यह भी देखा कि खदान मालिकों ने आंध्र और कर्नाटक के बीच की सीमाओं और दो अलग-अलग गाँव के बीच की सीमाओं को बदलकर रख दिया है और संरक्षित जंगल में भी खदाने खोलकर वहां से लोहे का खनन शुरू कर दिया है.

सबसे गंभीर बात ये थी कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश सरकार की खूब खिंचाई करते हुए कहा कि उसने इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया और अपना संवैधानिक कर्त्तव्य पूरा करने में विफल रही.

हालांकि मुख्यमंत्री रोसैय्या ने कहा कि सरकार केवल समिति की रिपोर्ट के आधार पर कर्रवाई नहीं कर सकती और उसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आदेश का इंतज़ार करना पड़ेगा. उन्होंने यह दावा भी किया कि समिति ने जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी है वो राज्य सरकार को नहीं मिली है.

इसपर समिति ने आंध्र प्रदेश के मुख्यसचिव को एक पत्र लिखकर याद दिलाया कि इस रिपोर्ट की एक कॉपी उन्हें और राज्य सरकार के वकील को दी जा चुकी है. साथ ही समिति ने राज्य सरकार से फिर एक बार कहा की वो छानबीन पूरी होने तक खदानों को दी गई अनुमति निलंबित कर दे. इसके बाद ही आंध्र प्रदेश सरकार ने यह काम उठाया है.

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