पूर्ण सुधार तक प्रोत्साहन नीतियों को जारी रखने पर एपेक सहमत (लीड-2)
दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद एशिया प्रशांत क्षेत्र के 21 नेताओं ने एक बयान में कहा, "अर्थव्यवस्था में एक टिकाऊ सुधार हासिल होने तक हम वित्तीय प्रोत्साहन नीतियों को जारी रखेंगे।"
एशिया प्रशांत के नेताओं ने कहा कि अर्थव्यवस्था में अब तक मजबूत सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने संरक्षणवादी उपायों को खारिज करने का वादा किया।
नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा, "संरक्षणवाद को खारिज करने और अपने बाजारों को खुला रखने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और मुक्त व्यापार एक समस्या नहीं समाधान का हिस्सा है।"
एशिया प्रशांत के नेताओं ने विकास के नए प्रतिमानों और आर्थिक एकीकरण के नए ढांचे का भी आग्रह किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए विलंब से शनिवार रात सिंगापुर पहुंचे।
इससे पहले उम्मीद जताई गई थी कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के नेता विकास के ऐसे नए प्रतिमानों की घोषणा करेंगे जिसमें संतुलित, समग्र और सतत विकास शामिल होंगे।
एपेक में अमेरिका, मेक्सिको, कनाडा, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और दक्षिण पूर्व एशिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं सहित पूर्वी एशिया और अमेरिका महाद्वीप के 21 देश शामिल हैं।
इससे पहले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वर्ष 2050 तक आधी कटौती करने के वादे के प्रावधान को एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) के शिखर सम्मेलन के घोषणा पत्र के मसौदे से हटा दिया गया।
चीनी विदेश मंत्रालय के कानून और संधि विभाग के अधिकारी यी जियानलियांग ने संवाददाता सम्मेलन में शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन पर सौदेबाजी में बाधा पड़ने की आशंका के कारण उत्सर्जन में कटौती के प्रस्ताव को मसौदे से हटाया गया।
यी ने कहा कि विश्व समुदाय में यह बहुत विवादास्पद मुद्दा है और एपेक जलवायु परिवर्तन पर चर्चा का स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में वर्ष 2007 में इंडोनेशिया के बाली में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के बाद से इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।
यी ने कहा कि दिसम्बर में कोपेनहेगन में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में शामिल पक्षों के बेहतर प्रयासों के बिना एक समझौते तक पहुंचने में कठिनाई होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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