माया ने की गन्ना नीति में बदलाव की मांग

केंद्र को लिखे गए पत्र में मायावती ने राज्यों को गन्ने की खरीद के लिए कीमत तय करने से रोकने के केंद्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) तय करने का राज्य सरकार का अधिकार बरकरार रखने के बावजूद केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते एक अध्यादेश जारी करते हुए एसएसपी और वैधानिक न्यूनतम मूल्य (एसएमपी) में किसी भी अंतर का भुगतान करने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बनाया गया है। अब इसे फेयर रिम्यूरेटिव प्राइस (एफआरपी) कहा जाएगा।
'भेदभाव कर रही केंद्र'
गन्ना किसानों की दशा पर केंद्र सरकार के भेदभाव पूर्ण रवैये का विरोध करते हुए मायावती ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की राय जाने बिना ही ऐसा फैसला ले लिया जिससे 40 लाख किसान प्रभावित होंगे।
अगर राज्य सरकार अध्यादेश पर अमल करती है तो उसे एसएसपी और एफआरपी के बीच अंतर का भुगतान करने में 1,500 करोड़ रुपये का भार वहन करना होगा। राज्य सरकार ने जहां पिछले हफ्ते 2009-10 पेराई सत्र के लिए 165 से 170 रुपये एसएपी घोषित किया है वहीं केंद्र सरकार ने 123 और 129 रुपये एफआरपी तय किया है।
गन्ना किसानों ने गुरुवार को बरेली में एक विशाल जनसभा करके केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी का इजहार किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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