शीला दीक्षित के नियंत्रण में एमसीडी

हालांकि अभी पूरी तरह से एमसीडी को दिल्ली सरकार के अधीन नहीं किया गया हां कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने का अधिकार जरूर सौंपा गया है। कुछ शक्तियां दिल्ली के उपराज्यपाल को भी सौंपी गई हैं।
पिछले साल तीसरी बार सीएम बनने के बाद उन्होंने एमसीडी, दिल्ली पुलिस और डीडीए को दिल्ली सरकार के अधीन लाने की मांग पुरजोर तरीके से रखी थी। केंद्र सरकार ने एमसीडी को पूरी तरह से तो दिल्ली सरकार को नहीं सौंपा मगर, एमसीडी ऐक्ट के तहत केंद्र को मिले अधिकारों को दिल्ली सरकार के हवाले कर दिया है। इनमें एमसीडी कमिश्नर की नियुक्ति और भंग करने का अधिकार भी शामिल है लेकिन इन दोनों ही मामलों में उसे केंद सरकार से पहले इजाजत लेनी होगी।
गृह मंत्रालय ने इस बारे में सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया। नोटिफिकेशन के अनुसार केंद्र सरकार के कुछ अधिकार उपराज्यपाल के पास अब भी बने रहेंगे लेकिन ज्यादातर अधिकार दिल्ली सरकार को दे दिए गए हैं। इनमें प्राइमरी एजुकेशन, वॉर्ड और जोनल कमिटियों का पुनर्गठन, वॉर्डों का डिलिमिटेशन, नक्शा पास कराने के लिए नियम तय करना और लैंड ऐंड बिल्डिंग के साथ-साथ टैक्सेशन शामिल हैं। अब एमसीडी को अपना बजट दिल्ली सरकार से पास कराना पड़ेगा। दिल्ली सरकार ही एमसीडी में नियुक्तियां करेगी और नोटिफिकेशन जारी कर सकेगी।
गृह मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि केंद्र सरकार एमसीडी पर नजर रखेगी और अगर महसूस किया गया तो इसके बाद भी और शक्तियां दिल्ली सरकार को सौंपने पर विचार किया जा सकता है।












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