मुवक्किल से मिलने में अड़चन

पाकिस्तान में मृत्यु दंड का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के वकील उवैस शेख़ को अपने मुवक्किल से मिलने में मुश्किल आ रही है और उन्होंने अदालत में इस आशय की याचिका दायर की है.
लाहौर हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई को मंज़ूर करते हुए गृह सचिव और जेल अधिकारियों को अदालत में तलब किया है. इसकी अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी.
सरबजीत सिंह को वर्ष 1990 में पाकिस्तान में हुए चार बम धमाकों के मामलों में दोषी पाया गया था और 1991 में फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी.
वर्ष 2003 में सरबजीत की अपील पर लाहौर हाई कोर्ट ने फाँसी की सज़ा को सही ठहराया था.
इसके बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भी वर्ष 2005 में इस फ़ैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी.
पिछले साल पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी उन्हे राहत दिए जाने की अर्ज़ी को ठुकरा दिया था.
मुवक्किल से मिलने का अधिकार
सरबजीत सिंह के वकील उवैस शेख़ ने अदालत से आग्रह किया है कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि वो अपने मुवक्किल से मिल सकें.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत करते हुए बताया, “मैं सरबजीत सिंह के मामले में भारत गया था और वहाँ से लौट कर मुझे उन्हें कुछ संदेश देना था.”
उन्होने आगे कहा, “मैंने जेल अधिकारियों को कहा कि मैं उनसे मिलना चाहता हूँ और पहले भी मिल चुका हूँ इसलिए मुझे मिलने की अनुमति दी जाए.”
उवैस शेख़ के मुताबिक़ जेल अधिकारियों ने उन्हें गृह मंत्रालय से अनुमति पत्र लाने को कहा.
उवैस शेख़ ने कहा, “गृह मंत्रालय के अनुमति पत्र के लिए मैंने आवेदन दिया था लेकिन उसे भी डेढ़ महीना हो चुका है और अभी तक कुछ नहीं हुआ है.”
सरबजीत सिंह के वकील ने बताया कि उन्होने तंग आकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और याचिका दायर की.
लाहौर हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई को मंज़ूर करते हुए गृह सचिव और जेल अधिकारियों को अदालत में तलब किया है. इसकी अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी.
उवैस शेख़ ने बताया कि एक वकील का अपने मुवक्किल से मिलने का पूरा अधिकार है और अधिकारी जानबूझ कर रुकावट बन रहे हैं.












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