सिब्‍बल पलटे, कहा जरूरी नहीं 80 प्रतिशत अंक

Kapil Sibal
नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए न्‍यूनतम 80 प्रतिशत अंक की शर्त रखकर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्‍बल ने छात्रों को हलकान कर दिया था। अब वो पीछे हट गए हैं। उन्‍होंने कहा है कि आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए उच्च अंक जैसी कोई पूर्व शर्त नहीं होगी।

सिब्बल ने मीडिया से बातचीत में कहा, "संयुक्त प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों के 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने संबंधी रिपोर्ट निराधार है।"

सिब्बल ने सोमवार को कहा था कि आईआईटी प्रवेश प्रक्रिया में 12वीं कक्षा के अंकों को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि आईआईटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों की वर्तमान पात्रता को 60 प्रतिशत अंक से बढ़ा कर 80 से 85 प्रतिशत कर देनी चाहिए।

पेशेवर कोचिंग संस्‍थानों से मुक्ति मिले

सिब्बल ने यह टिप्पणी यहां आईआईटी काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए की थी। लेकिन सिब्बल ने मंगलवार को कहा कि एक नई प्रणाली के लिए एचआरडी मंत्रालय के उस प्रस्ताव से संबंधित रिपोर्ट निराधार है, जिसके तहत केवल 12वीं कक्षा में उच्च अंक पाने वाले विद्यार्थियों को ही पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं में बैठने की अनुमति होने की बात कही गई है।

आईआईटी काउंसिल की बैठक में सिब्बल ने कहा कि वह मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं के लिए पेशेवर कोचिंग से भी मुक्ति चाहते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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