आईआईटी में कैसे दाखिला पाएंगे बिहार के छात्र

Nitish Kumar
पटना। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा भारतीय प्रौद्यागिकी संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए 12वीं कक्षा के प्राप्तांकों को महत्व देने की प्रस्तावित योजना से बिहार के छात्रों की आईआईटी में भागीदारी कम होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। बिहार में बारहवीं के परिणामों को देखते हुए मुख्‍यमंत्री नितीश कुमार ने सिब्‍बल से इस संबंध में दोबारा विचार करने का आग्रह किया है।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित होने वाली 12वीं कक्षा (विज्ञान संकाय) की परीक्षा में वर्ष 2009 में 53.22 प्रतिशत छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए थे, जबकि 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की संख्या मात्र 168 थी।

मात्र 168 छात्र 80 प्रतिशत से ऊपर

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2009 में आयोजित 12वीं कक्षा (विज्ञान संकाय) की परीक्षा में कुल 211,723 छात्रों ने भाग लिया, जिसमें से 112,678 छात्र प्रथम श्रेणी से पास हुए परंतु 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक 168 छात्र ही प्राप्त कर सके थे। इसी तरह वर्ष 2008 में महज 8.58 प्रतिशत ही छात्र प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कर पाए थे। वर्ष 2008 में राज्य में सर्वोच्च अंक पाने वाले छात्र को 84.4 प्रतिशत अंक मिले थे।

आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में बिहार से प्रतिवर्ष लगभग 10,000 छात्र सम्मिलित होते हैं जिसमें से औसतन 200 छात्रों का चयन होता है। इस मामले पर पटना में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए प्रसिद्घ संस्थान 'सुपर थर्टी' के संचालक कुमार आनंद कहते हैं कि राज्य के बोर्ड का पाठ्यक्रम और मूल्याकंन पद्धति इस तरह है कि इसमें 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाना काफी कठिन है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की यह योजना गांव-देहात और गरीब बच्चों के साथ अन्याय है।

इससे गरीब छात्रों का आईआईटी में प्रवेश प्रभावित होगा। 'परमार कोचिंग संस्थान' के अनिल परमार कहते हैं कि यह योजना आईआईटी का शहरीकरण करने का है। उन्होंने कहा कि बिहार के छात्रों के लिए यह फैसला काफी निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे फैसले जल्दबाजी में नहीं बल्कि सोच-समझ कर लेने चाहिये।

नितीश कुमार ने आपत्ति व्‍यक्‍त की

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सोमवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के इस विचार पर आपत्ति व्यक्त करते हुए इसे बिहार के छात्रों के हित के खिलाफ बताया था। उन्होंने कहा था कि इस मामले पर वे केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपनी आपति दर्ज कराएंगे।

गौरतलब है कि कि सिब्बल ने आईआईटी में प्रवेश के लिए 12वीं में न्यूनतम अंकों की सीमा 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने की बात कही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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