यूपी के प्रति गंभीर राहुल गांधी

जनता के ढाई हजार करोंड़ रुपए से अपनी और कांशीराम की मूर्तियां लगवाने में जुटीं राज्य की मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट दे दिया है, लेकिन जल्द ही जनता की बारी आएगी, अपना जजमेंट देने की। बसपा सरकार के प्रति जनता की भड़ास अगले विधानसभा चुनावों में निकल सकती है। यह बात स्वयं राहुल गांधी भी जानते हैं कि कांग्रेस के लिए यह एकदम सही समय है जनता के दिल के करीब पहुंचने का।
दलित के घर में रात गुजारी
इसके लिए राहुल गांधी युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं। मायावती जिन दलितों को अपनी शक्ति मानती हैं, राहुल उन्हीं को अपनी ओर खींचना चाहते हैं। इसलिए उनका बार-बार दलित समाज से मिलनाजुलना लगा हुआ है। कुछ महीने पहले रायबरेली और अमेठी के बाद बुधवार को उन्होंने श्रावस्ती जिले के रामपुर-देवगना में एक दलित के घर गुजारी। उन्होंने न सिर्फ वहां खाना खाया बल्कि गांव में घूमे भी।
राहुल गांधी ने लोगों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछा और साथ ही यह भी जाना कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ उन तक पहुंच पा रहा है कि नहीं। राहुल बुधवार शाम से राज्य के बाराबंकी, फैजाबाद और बहराइच के अलग-अलग इलाकों का औचक दौरा करते हुए देर रात श्रावस्ती पहुंचे थे।
राहुल के गोपनीय दौरे से माया हलकान
बुधवार को अचानक उत्तर प्रदेश के चार जिलों का गोपनीय दौरा करने निकले कांग्रेस महासचिव के इस काम से मुख्यमंत्री मायावती हलकान हैं। उन्होंने खुद भले ही कोई टिप्पणी न की हो, लेकिन सरकार ने उनकी बात राहुल तक पहुंचा दी।
अधिकारियों ने साफ कहा कि राहुल गांधी को बिना सूचना दिए इस तरह दौरा नहीं करना चाहिए। कम से कम सुरक्षा इकाई को तो सूचना दे ही देनी चाहिए थी। ऐसा करके राहुल गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ा है। इस पर कांग्रेस ने जवाब दिया, "कोई भी राजनीतिक दल अपने कार्यक्रम या दौरे के बारे में अन्य राजनीतिक दल को नहीं बताता है। हां, विशेष सुरक्षा बल (एसपीजी) को इस बारे में जरूर बता दिया गया था। इसके बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की हो जाती है।"












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