समलैंगिकता पर केंद्र नहीं बनेगा पक्ष

Homosexuals
नई दिल्ली। समलैंगिकता के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने अपना पल्ला झाड़ते हुए इससे अलग होने का फैसला किया है। यानी धारा-377 को लेकर केंद्र सरकार ना तो दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन करेगी और ना ही विरोध। यह फैसला गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बताया कि कैबिनेट ने मंत्रियों के समूह की सिफारिश पर विचार करने के बाद यह फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सहायता अटॉर्नी जनरल करेंगे।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दो व्यस्कों के बीच आपसी रजामंदी से बने समलैंगिक संबंधों को जायज ठहराने का फैसला दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मामले के संबंध में हलफनामा दायर कर अपना रुख साफ करने को कहा था।

काफी सोच-विचार के बाद केंद्र ने मामले से खुद को अलग रखने का फैसला किया है। कैबिनेट के इस फैसले से साफ हो गया है कि केन्द्र सरकार दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले की सुप्रीम कोर्ट में मुखालफत नहीं करेगी।

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