इशरत का एंकाउंटर फर्जी नहीं था: गुजरात

अदालत ने कहा मुठभेड़ फर्जी थी
जून 2004 में 19 वर्षीया कॉलेज छात्रा इशरत जहां और उसके तीन दोस्तों की मौत मामले में फैसला देते हुए अहमदाबाद की अदालत ने कल सोमवार को उसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया। फैसले के एक दिन बाद आज मंगलवार को इशरत के परिवार वालों ने दोषी पुलिस वालों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।
गुजरात सरकार ने कहा है कि वो एनकाउंटर आईबी की सूचना के आधार पर किया गया था। आईबी की रिपोर्ट में ही ये कहा गया था कि इशरत जहां और उसके साथी आतंकवादी हैं। गुजरात सरकार यह भी कहा है कि जब ये मामला हाईकोर्ट में है, तो ऐसे में कोई मजिस्ट्रेट जांच कैसे कर सकता है।
2002 में हुआ था एंकाउंटर
असल में ठाणे जिले के उपनगर मुंबरा में रहने वाली इशरत मुंबई के गुरुनानक खालसा कॉलेज की बीएससी की छात्रा थी। उसकी मौत से दो साल पहले 2002 में उसके पिता की मृत्यु हुई थी। अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा (अनुसंधान) ने शहर के बाहरी क्षेत्र में 15 जून 2004 को एक कथित मुठभेड़ में इशरत और उसके तीन दोस्तों जावेद गुलाम उर्फ प्रनेश कुमार पिल्लई, अमजद अली उर्फ राजकुमार अकबर अली राणा और जीशान जौहर अब्दुल गनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पुलिस ने दावा किया था कि ये चारों आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और उनका इरादा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का था।












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