'महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया जाना चाहिए'

सामाजिक कार्यकर्ता रूपरेखा वर्मा ने आईएएनएस से बाचतीच में केंद्र सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण हो जाने के बाद अब और ज्यादा महिलाएं सामने आएंगी और उनकी सहभागिता बढ़ेगी।

वर्मा ने कहा कि अभी तक पंचायतों में 30 फीसदी आरक्षण ही था लेकिन हमने कई ऐसी महिला सरपंचों को देखा जिन्होंने अपने पतियों के भरोसे न रहकर खुद काम हाथ में लिया अपनी कार्यप्रणाली और नेतृत्व क्षमता से सबको चौंका दिया। इस फैसले के बाद निश्चति तौर पर बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेंगे।

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष एस.के.द्विवेदी ने कहा कि सरकार का यह फैसला स्वागतयोग्य है। निश्चति तौर से इस फैसले से महिलाओं का सशक्तिकरण होगा।

द्विवेदी ने कहा कि लेकिन पंचायतों में महिलाओं की भागेदारी बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जिससे कि सही अर्थो में उनकी भागेदारी सुनिश्चति हो सके। नहीं तो केवल संख्या तो बढ़ जाएगी लेकिन सही अर्थो में उनकी भागेदारी सुनिश्चति नहीं होगी।

रायबरेली जिले की मुरैठी ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान श्वेता शुक्ला ने कहा कि हम केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि पंचायतों और स्थानीय निकायों के जरिए सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास में सरकार को सफलता मिलेगी।

मालूम हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ा कर 50 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अभी पंचायतों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण प्राप्त है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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