भारत ने श्रीलंका से कहा, नागरिकों की जिंदगी खतरे में न पड़े (लीड-1)
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के टाइगरों के खिलाफ श्रीलंकाई सेना द्वारा आक्रामक रुख अख्तियार कर लेने के बीच विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने वादा किया है कि किसी भी प्रकार की बमबारी के दौरान उन क्षेत्रों का खासा ध्यान रखा जाएगा जहां नागरिक रहते हैं।
उन्होंने कहा, "हमने उनसे कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि श्रीलंकाई सेना और लिट्टे के बीच जारी संघर्ष के दौरान सामान्य नागरिकों के जान की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हम लिट्टे से भी यह आग्रह करते हैं कि वे नागरिकों को सुरक्षित क्षेत्रों में जाने दें। सामान्य नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
इससे पहले, मंत्रिमंडल की बैठक के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा कि श्रीलंका सरकार और लिट्टे दोनों को उनके आग्रह पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार श्रीलंका की स्थिति को लेकर काफी चिंतित है।
चिदंबरम ने कहा कि भारत, श्रीलंका सरकार पर 48 घंटे तक सैनिक कार्रवाई रोकने के लिए दबाव डाल सकता है लेकिन लिट्टे की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई आज भी जारी है। आज तक अभी लिट्टे से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
चिदंबरम ने कहा कि दोनों पक्षों को हमारी अपील पर ध्यान देना चाहिए। लिट्टे को हथियार डाल देना चाहिए। श्रीलंका को भी शत्रुता त्याग देनी चाहिए। जब दोनों पक्ष साथ आएंगे तभी बात बनेगी।
उन्होंने कहा कि नागरिकों की मौतों से हम सभी बहुत दुखी हैं और उनसे जो संभव होगा वह करेंगे।
लिट्टे कार्यकर्ताओं के तमिल शरणाíथयों के साथ तमिलनाडु में घुसने की संभावना के बारे में गृहमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार को इस बारे में सतर्क किया है। भारत में लिट्टे एक प्रतिबंधित संगठन है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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