'चावला के मुद्दे पर अदालत जाए भाजपा'

बीबीसी हिंदी रेडियो के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में बोलते हुए उन्होंने कहा, "अगर भाजपा ये समझती है की एन गोपालस्वामी की सिफ़ारिश पर नवीन चावला को हटाया जाना संवैधानिक है, तो उन्हें राजनीति करने की बजाए अदालत में जाना चाहिए ताकि इस मुद्दे पर अदालत फ़ैसला दे सके."
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति से चुनाव आयुक्त नवीन चावला को बर्खास्त करने की सिफ़ारिश की थी जिसे केंद्र सरकार ने ख़ारिज़ कर दिया था.
दूसरी तरफ़ मंगलवार को आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों के तहत केंद्रीय चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक की, जिसमें राजनीतिक दलों ने चुनावों को कई दौर में कराने का विरोध किया.
राजनीतिक रंग
अगर भाजपा ये समझती है की एन गोपालस्वामी की सिफ़ारिश पर नवीन चावला को हटाया जाना संवैधानिक है, तो उन्हें राजनीति करने की बजाए अदालत में जाना चाहिए ताकि इस मुद्दे पर अदालत फ़ैसला दे सके कपिल सिब्बल
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जब कपिल सिब्बस से पूछा गया कि क्या उन्हें ऐसा नहीं लगता की इस मुद्दे पर सरकार नवीन चावला के साथ खड़ी है, जबकि मुख्य विपक्षी दल भाजपा एन गोपालस्वामी के साथ. तो उनका कहना था, " ये बात सही है और ये दुख की बात है. भाजपा ने इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया है."
कपिल सिब्बल का कहना था की नवीन चावला पर भाजपा शुरू से ही निशाना साधती रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट तक ने उनके मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था.
तो क्या पिछले दिनों के विवाद को देखते हुए चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों की प्रक्रिया बदलने की ज़रूरत नहीं है. क्या ऐसी व्यवस्था बनाने की ज़रूरत है जिसमे सिर्फ़ सरकार ही सर्वे-सर्वा ना रहे.
इस सवाल पर सिब्बल का कहना था, "सरकार इस पर विचार कर सकती है और सभी राजनीतिक दल भी इस पर विचार कर सकते हैं, हमारा संदेह इस मुद्दे को उठाए जाने के समय को लेकर है."
उन्होंने यह भी माना की चुनाव आयुक्तों के रिटायर होने के बाद कोई लाभ के पद या सरकारी पद स्वीकार करने पर पाबंदी की शर्त पर विचार किया जाना चाहिए.












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