गज़ा में स्कूलों पर मिसाइल हमला

जबालिया शरणार्थी शिविर के अल फ़कुरा स्कूल पर हुए इस हमले में कई बच्चों के मारे जाने की आशंका है. स्कूल में बड़ी संख्या में लोगों ने शरण ली थी.
फ़लस्तीनी स्वास्थ्य सेवा का कहना है कि पिछले ग्यारह दिनों से चल रहे इसराइली हमलों में अब तक 600 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
मंगलवार को गज़ा में हुए इसराइली हमलों में अब तक 70 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
गज़ा में कोई सुरक्षित नहीं है, हज़ारों लोगों का जीवन ख़तरे में है. इतनी घनी आबादी वाले इलाक़े में बिना सैकड़ों आम नागरिकों को क्षति पहुँचाए सैनिक कार्रवाई करना असंभव काम है जॉन गिंग, राहतकर्मी
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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मिसाइल सीधे स्कूल की इमारत पर जाकर गिरी जिसके भीतर सैकड़ों लोगों ने शरण ले रखी थी.
स्कूल के भीतर से आने वाली तस्वीरों में खून से लथपथ लोग और लाशें दिखाई दे रही हैं. मिसाइल हमले के बाद लोगों को बेत लहिया और गज़ा के अस्पतालों में ले जाया गया.
गज़ा से निष्पक्ष समाचारों का मिलना काफ़ी कठिन हो गया है क्योंकि इसराइल ने विदेशी पत्रकारों के वहाँ जाने पर रोक लगा दी है.
कमाल अदवान अस्पताल ने 30 और बेत लहिया के अल शिफ़ा अस्पताल ने 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है. डॉक्टरों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर है.
दरअसल, मंगलवार के दिन इसराइली सेना ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से संचालित दो स्कूलों पर हमला किया, इससे पहले बुर्ज नाम के शिविर में स्थित स्कूल पर मिसाइल हमला किया गया था जिसमें तीन फ़लस्तीनी मारे गए.
'भयावह हालत'
रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र की कल्याणकारी संस्था यूएनआरडब्ल्यूए का कहना है कि गज़ा में हालात भयावह हैं और एक भीषण मानवीय त्रासदी को टालने के लिए क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.
फ़लस्तीनी इलाक़े में यूएनआरडब्ल्यूए के प्रमुख जॉन गिंग कहते हैं, "गज़ा में कोई सुरक्षित नहीं है, हज़ारों लोगों का जीवन ख़तरे में है. इतनी घनी आबादी वाले इलाक़े में बिना सैकड़ों आम नागरिकों को क्षति पहुँचाए सैनिक कार्रवाई करना असंभव काम है."
गज़ा में रेड क्रॉस के वरिष्ठ अधिकारी पियर क्रेंबल ने कहा है कि गज़ा जीवन असह्य होता जा रहा है, उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दी ही अगर कुछ नहीं किया गया तो स्थिति "भीषण मानवीय त्रासदी" में बदल जाएगी.
स्कूलों पर हुए मिसाइल हमले के बारे में इसराइली सेना ने कुछ नहीं कहा है लेकिन पहले वे आरोप लगाते रहे हैं कि चरमपंथी छिपने के लिए स्कूलों, मस्जिदों और अस्पतालों की ओट लेते हैं.












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