छोटे-मोटे उपायों से नहीं दूर होगा मंदी का संकट : भाकपा

नईदिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का मानना है कि सरकार के छोटे-मोटे राहत पैकेज से मौजूदा वित्तीय संकट का हल नहीं निकल सकता है, बल्कि इससे उबरने के लिए सरकार को सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों को मजबूत बनाने की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने शनिवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पूरी दुनिया में पूंजीवाद का संकट इतना अधिक गहरा गया है कि उससे उबरने के लिए भारत सरकार द्वारा किए मामूली उपाय नाकाफी है। अमेरिका और यूरोप पर निर्भर रहने वाली सभी अर्थव्यवस्थाओं पर इसका प्रभाव अनिवार्य है।

अंजान ने कहा कि सरकार को आर्थिक संकट से बचने के लिए सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों को मजबूत बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वाम दलों के सरकार को समर्थन देने और वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश को रोकने के लिए दबाव बनाने से ही देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद होने से बच पाई है।

भाकपा नेता ने कहा कि भारत ने अमेरिका की तरह वित्तीय संस्थानों का निजीकरण पहले ही किया होता तो अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह गई होती। उन्होंने सरकार से बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्ताव को वापस लेने को कहा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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