बांग्लादेश चुनाव में हसीना के गठबंधन की ऐतिहासिक जीत (राउंडअप)

हसीना की इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फोन पर उन्हें बधाई दी और नई सरकार के साथ द्विपक्षीय संबधों में प्रगाढ़ता की आशा व्यक्त की।

मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत दोनों देशों की जनता की बेहतरी के लिए बांग्लादेश की नई सरकार व वहां की जनता के साथ मिल कर काम करने को इच्छुक है।"

सोमवार को हुए आम चुनाव में हसीना की पार्टी अवामी लीग ने अकेले 230 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि शेष सीटों पर उसके सहयोगी दलों ने जीत दर्ज की।

दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को महज 29 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। खालिदा के इस्लामी गठबंधन में सहयोगी पार्टी जमात-ए-इस्लामी को दो सीटों पर जीत हासिल हुई है। चुनाव में चार निर्दलीय उम्मीदवारों को भी सफलता मिली है।

हसीना के प्रमुख सहयोगी व पूर्व सैनिक शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद की जातीय पार्टी ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की। हसीना, खालिदा व इरशाद ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में शानादर जीत दर्ज की।

कुल 300 सीटों वाली संसद के लिए सोमवार को 299 सीटों पर मतदान हुआ था। एक प्रत्याशी के निधन हो जाने के कारण नोवाखली-1 सीट पर मतदान 12 जनवरी तक स्थगित कर दिया गया है। वहां नए सिरे से चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

पिछले निर्वाचित संसद (2001-06) में दो-तिहाई बहुमत का आनंद उठा चुकीं खालिदा जिया व उनके इस्लामी गठबंधन के लिए यह चुनाव एक तरह से घातक सिद्ध हुआ है।

इस जीत के बाद जहां हसीना ने राहत की सांस ली है, वहीं खालिदा ने 220 सीटों पर धांधली का आरोप लगाया है। जबकि दोनों महिला प्रतिद्वंद्वियोंे, कार्यवाहक सरकार और चुनाव आयोग ने सोमवार के चुनाव के प्रति पूरी संतुष्टि जाहिर की थी।

यहां तक कि यूरोपीय संघ सहित कई अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी 70 प्रतिशत मतदान को निष्पक्ष मतदान करार दिया था।

खास बात यह कि संसदीय चुनाव में कई हिंदू उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की। जीत हासिल करने वालों में अवामी लीग के सुरनजीत सेनगुप्ता, नारायण चंद्र चंदा, रमेशचंद्र सेन और मनोरंजन गोपालशील शामिल हैं। हसीना और उनके गठबंधन ने देश के सभी इलाकों में बेहतर प्रदर्शन किया।

देश भर में 35216 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। चुनाव मैदान में कुल 1,555 उम्मीदवार थे। चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए 200,000 से ज्यादा स्थानीय और 500 से ज्यादा विदेशी पर्यवेक्षक मौजूद थे।

उधर सैन्य समर्थित कार्यवाहक सरकार ने कहा है कि वह नवनिर्वाचित सरकार को एक सप्ताह के भीतर सत्ता सौंप देगी।

कार्यवाहक सरकार में मंत्री एम. अनवारुल इकबाल ने कहा कि एक राजपत्र के प्रकाशन के बाद सात दिनों के भीतर नवनिर्वाचित सरकार को सत्ता सौंप दी जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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