क्रांति के 50 साल बाद भी क्यूबा के समक्ष गंभीर चुनौतियां
हवाना, 29 दिसम्बर (आईएएनएस)। कम्युनिस्ट क्रांति की 50 वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारियों में लगे क्यूबा के समक्ष गंभीर चुनौतियां हैं।
समाचार एजेंसी ईएफई के अनुसार क्यूबा में अधिकांश शीर्ष पदों पर वे लोग ही विराजमान हैं, जिन्होंने वर्ष 1959 में तानाशाह बतिस्ता के खिलाफ संघर्ष में भाग लिया था। देश की बागडोर फिदेल कास्त्रो के भाई राउल कास्त्रो के हाथ में है और मंत्रिमंडल की औसत आयु 71 वर्ष है। शासन पर अब भी फिदेल कास्त्रो की पकड़ को महसूस किया जा सकता है।
उनके लेख बराबर प्रकाशित होते रहते हैं। फिर भी क्यूबा इतिहास के एक ऐसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है जहां शासन का बोझ नई पीढ़ी के कंधों पर सौंपने में अधिक विलंब नहीं संभव नहीं है।
शिक्षा और स्वास्थ्य ऐसे दो क्षेत्र हैं , जिनमें क्यूबा ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब इन दोनों क्षेत्रों में भी कमियां आने लगी हैं। क्यूबा के प्राथमिक स्कूलों के 50 प्रतिशत शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण नहीं मिला है।
फिदेल कास्त्रो की सरकार ने उन क्षेत्रों में भी चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जहां पहले कभी कोई चिकित्सा व्यवस्था नहीं थी। अब क्यूबा के अधिकारी अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को फिर से नियोजित कर रहे हैं क्योंकि लाखों चिकित्सकों को वेनेजुएला भेजा गया है, ताकि तेल के दाम का भुगतान हो सके।
आर्थिक क्षेत्र में भी क्यूबा को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। खाद्यान्न आयात पर देश काफी हद तक निर्भर है। क्यूबा सरकार अपने आर्थिक संकट के लिए अमेरिका के 1962 से जारी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराती है।
इसके विपरीत क्यूबा के अर्थशास्त्री कृषि आधारित आर्थिक मॉडल और विदेशी सहायता पर निर्भरता को आर्थिक संकट का कारण मानते हैं। देश पहले सोवियत संघ की सहायता पर निर्भर था और उसके पतन के बाद तेल संपन्न वेनेजुएला पर निर्भर हो गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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