जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस ने बढ़ाया असमंजस (लीड-1)

नई दिल्ली, 29 दिसम्बर (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर में किसकी सरकार बनेगी और कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इसे लेकर अभी तक असमंजस बरकरार है। नई सरकार के गठन को लेकर चल रही कवायद के बीच राज्य की सत्ता की कुंजी अपने पास रखने वाली कांग्रेस ने कहा है कि राज्य में उसके लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा "हमारे लिए सभी विकल्प खुले हैं। कांग्रेस नेतृत्व सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। जम्मू-कश्मीर में हमारी प्राथमिकता होगी ऐसी स्थिर सरकार देने की जो जनमत की भावना के अनुकूल हो।"

उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर की परिस्थितियां अन्य राज्यों से भिन्न है। यह पाकिस्तान से सटा बेहद संवेदनशील राज्य है। यहां की परिस्थियों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व राज्य के आला कांग्रेसी नेताओं से विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा।"

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की मार झेल रहा है। ऐसे में लोगों ने भारी संख्या में मतदान किया और अपना निर्णय सुना दिया। राज्य में मिले जनादेश के अनुसार ही उनकी पार्टी कोई निर्णय करेगी।

जम्मू-कश्मीर के नतीजों को खंडित जनादेश मानने से इंकार करते हुए तिवारी ने कहा, "चुनावी नतीजे भारतीय राजनीति की विविधता को दर्शाता है। ये नतीजे लोगों की सोच में आए व्यापक बदलाव की ओर भी इंगित करता है। यह सोच मसला-ए-कश्मीर से मसाइल-ए-कश्मीर तक बदला है।"

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस सिलसिले में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज से सोमवार देर रात मंत्रणा करेंगी। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के वरिष्ठ नेता फारूख अब्दुल्ला के भी देर रात सोनिया से मिलने की संभावना है।

बहरहाल, सरकार बनाने से पहले कांग्रेस सभी संभावनाओं को तलाश लेना चाह रही है। नेकां से भी उसके अच्छे संबंध हैं। अमरनाथ मुद्दे पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) द्वारा आजाद के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेने के बावजूद कांग्रेस के कई नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के प्रति भी सकारात्मक रवैया रखते हैं। नेकां और पीडीपी दोनों ने ही कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की इच्छा जाहिर की है। आखिरकार कांग्रेस के पास सत्ता की कुंजी जो है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर की कुल 87 विधानसभा सीटों में नेशनल कांफ्रेंस को 28, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को 20 और कांग्रेस को 17 सीटें मिली हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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