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आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान ने भारत पर पलटवार किया (लीड-1)

By Sridhar L
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'द न्यूज' अखबार की वेबसाइट पर जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी विदेश मंत्री मलिक अहमद ने बुधवार को इस संबंध में पाकिस्तानी संसद में एक प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

इस प्रस्ताव में भारत में सक्रिय आतंकवादी समूहों को नष्ट करने और पाकिस्तान के खिलाफ दुष्प्रचार रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भारत पर दबाव डालने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान शांति और स्थिरता के साथ-साथ भारत के साथ व्याप्त तनाव भी खत्म करना चाहता है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि मुंबई हमला भारत के खुफिया तंत्रों की विफलता का परिणाम है इसलिए उसे पाकिस्तान पर दोषारोपण नहीं करना चाहिए। प्रस्ताव पारित होने के बाद संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

इसी बीच नई दिल्ली में भारत की ओर से कहा गया है कि सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस सउद अल-फैसल के एकदिवसीय भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए भारत सऊदी अरब की मदद से पाकिस्तान पर दबाव डालेगा। फैसल की भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात होना है।

इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि यदि मुंबई आतंकवादी हमले में पाकिस्तानी धरती के इस्तेमाल के बारे में भारत सबूत दे तो वे स्वयं राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध करेंगे।

समाचार पत्र 'द न्यूज' ने बुधवार को खबर दी कि लाहौर स्थित पंजाब के मुख्यमंत्री के सचिवालय में क्रिसमस के मौके पर आयोजित समारोह के दौरान अपने संबोधन में शरीफ ने कहा कि उन्हें लगता है कि इन हमलों में पाकिस्तान सरकार का कोई हाथ नहीं है।

उन्होंने कहा, "अगर भारत सरकार के पास कोई सबूत नहीं है तो उसे झूठे आरोप लगाकर क्षेत्र में तनाव पैदा नहीं करना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के भविष्य के लिए यही बेहतर होगा कि वे अपने मतभेद बातचीत के जरिए सुलझाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है और वह मुंबई हमलों के दोषियों को पकड़वाने में भारत की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।

उधर, पाकिस्तान के सीनेटरों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश की भूमिका की समीक्षा करने और भारत के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए अफगानिस्तान सीमा से सेना हटाने का आग्रह किया है।

दैनिक समाचार पत्र 'डॉन' के मुताबिक सीनेटरों ने कराची से 10 लोगों के एक गिरोह के मुंबई जाकर हमला करने के भारत के बेसिर-पैर के आरोप को खरिज कर दिया।

उधर, अमेरिका का कहना है कि मुंबई आतंकवादी हमलों से पाकिस्तान के दूर-दराज के इलाकों में तालिबान के खिलाफ जारी अभियान में गतिरोध उत्पन्न हो गया है।

अमेरिकी ज्वांइट चीफ ऑफ स्टॉफ एडमिरल माइक मुलेन ने पाकिस्तान दौरे से स्वदेश लौटते हुए विमान में संवाददाताओं से कहा कि मुंबई हमला सोचा-समझा अभियान था।

उन्होंने कहा कि इस हमले के बाद से पाकिस्तान के कबायली इलाकों में तालिबानी आतंकवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में गतिरोध उत्पन्न हो गया है।

मुलेन के मुताबिक मुंबई हमले से अफगानिस्तान की सीमा से लगे बैजूर में पाकिस्तानी सरकार तालिबानियों के खिलाफ अभियान चला रही थी।

अपने पाकिस्तान प्रवास के दौरान मुलेन ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल अशफाक कियानी और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शूजा पाशा से मुलाकात कर मुंबई हमले के संदर्भ में चर्चा की।

मुलेन ने कहा, "मेरा पाकिस्तान दौरा सकारात्मक और अच्छा रहा। इससे अमेरिका-पाकिस्तान संबंध में निरंतरता बनी रहेगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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