अतिरिक्त प्रकाश उत्पन्न करने में मददगार होगी नई खोज
पौधों की तरह सौर कोशिकाएं भी प्रकाश को ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं। पौधे यह काम अपने शाकीय हिस्से (पत्तियों) के अंदर करते हैं, जबकि सौर कोशिकाएं यह काम एक अतिरिक्त परमाणुओं से घिरे अर्धचालक क्रिस्टल में करते हैं।
वर्तमान सौर कोशिकाएं सभी आपतित प्रकाश को उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित नहीं कर सकतीं, क्योंकि कुछ प्रकाश कोशिका से बाहर निकल कर हवा में विसरित हो जाता है।
इसके अलावा अन्य मुद्दा यह है कि सूर्य की किरणें विभिन्न रंगों में होती हैं और कोशिका नीले प्रकाश को परिवर्तित करने में ज्यादा प्रभावी तथा लाल रंग के प्रकाश को परिवर्तित करने में कम प्रभावी होती है।
लेकिन नैनो कणों का इसके साथ समायोजन इन समस्याओं को ठीक कर देता है। इस नई खोज का मुख्य पहलू है, एक संक्षिप्त विद्युतीय व्यवधान, जिसे 'सर्फेस प्लाज्मान' कहते हैं।
ऐसे में जब प्रकाश, धातु के किसी टुकड़े से टकराता है तो वह धातु की सतह पर तरंगे पैदा करता है। उसके बाद इलेक्ट्रॉनों की ये तरंगें तालाब में सतह पर उठने वाली तरंगों की तरह आगे बढ़ती हैं।
नीदरलैंड्स में एफओएम इंस्टीट़्यूट फॉर एटॉमिक एंड मॉलीक्यूलर फिजिक्स में काम करते हुए कैचपोल व पोलमैन ने पाया कि दीर्घ तरंगदैर्ध्य (लाल) वाला प्रकाश 10 से अधिक घटकों के जरिए विकसित किया जा सकता है।
कैचपोल ने कहा है, "प्लाज्मॉनिक सौर कोशिकाओं के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि वे किसी भी प्रकार के सौर कोशिका में लागू हो सकती हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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