कैनवस पर सिनेमा को परिभाषित करने की कोशिश

कोलकाता, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। फिल्म देखने के बाद हम या तो दोस्तों के साथ उस पर चर्चा करते हैं या उसकी समीक्षा पढ़ते हैं, लेकिन कुर्ची दासगुप्ता अपनी प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग अंदाज में कैनवस पर उतार कर प्रस्तुत करती हैं।

कोलकाता, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। फिल्म देखने के बाद हम या तो दोस्तों के साथ उस पर चर्चा करते हैं या उसकी समीक्षा पढ़ते हैं, लेकिन कुर्ची दासगुप्ता अपनी प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग अंदाज में कैनवस पर उतार कर प्रस्तुत करती हैं।

34 वर्षीय लेखिका व चित्रकार ने विश्व की बेहतरीन 16 फिल्मों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को ऑयल कलर के जरिए कैनवस पर उतारा है, जिसकी प्रदर्शनी इसी महीने 18 से 25 सितम्बर तक लंदन के 'एमपी बिरला मिलेनियम आर्ट गैलरी' में लगाई जाएगी।

दासगुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "मेरी पेंटिंग फिल्म के किसी एक दृश्य या चरित्र को लेकर नहीं बनाई गई है, बल्कि पूरी फिल्म को एक फ्रेम में प्रस्तुत करने की कोशिश है।"

वर्ष 2005 में कोलकाता छोड़ काठमांडू में बस गईं दासगुप्ता के अनुसार चित्रकारी करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि वास्तविक सिनेमा को हम धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं। अपनी पेंटिंग के जरिए वे इन्हीं भावनाओं को दुनिया के सामने लाना चाहती हैं।

दासगुप्ता की इस प्रदर्शनी का आयोजन भारतीय विद्या भवन ने किया है। महाभारत के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को जल्दी ही वे कैनवस पर उतारेंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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