उत्तर भारत में भी आ सकती है कोसी जैसी बाढ़
नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। कोसी नदी के मार्ग में आए परिवर्तन के कारण उत्तर बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ की तरह ही देश के उत्तरी इलाकों में चिनाब, रावी, सतलुज और ब्यास नदियां भी आने वाले समय में तबाही मचा सकती हैं।
नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। कोसी नदी के मार्ग में आए परिवर्तन के कारण उत्तर बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ की तरह ही देश के उत्तरी इलाकों में चिनाब, रावी, सतलुज और ब्यास नदियां भी आने वाले समय में तबाही मचा सकती हैं।
पुणे विश्वविद्यालय और वहां के सैन्य इंजीनियरिंग कॉलेज के शोधकर्ताओं केअनुसार हिमालय से निकलने वाली इन नदियों के मार्ग में भी बदलाव आ सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही मच सकती है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि पिछले चार दशकों के दौरान इन नदियों में कई बार भारी बाढ़ आई। शोधकर्ताओं ने ग्लेसियरों के पिघलने के बारे में अध्ययन किया और पाया कि जयवायु परिवर्तन के कारण नदियों का बहाव बदल रहा है।
शोधकर्ता और सैन्य इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर एम. आर. भुटियानी ने आईएएनएस से कहा, "समान्य तौर पर मानसून में हिमालय से निकलने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।"
भुटियानी ने कहा कि गत चार दशकों में आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इन नदियों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है।
उनका कहना है जलवायु परिवर्तन के कारण छोटे ग्लेसियर बड़े ग्लेसियरों की तुलना में तेजी से पिघल रहे हैं और आने वाले समय में उनके खत्म होने की संभावना है।
भुटियानी के मुताबिक मानसून में उतार-चढ़ाव की स्थिति में ग्लेसियर इन नदियों में पानी के बहाव को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण उनकी यह भूमिका आने वाले समय में खत्म हो जाएगी।
शोधकर्ताओं ने पाया कि चेनाब और सतलुज नदी में ग्लेसियरों के पिघलने के कारण पानी के प्रवाह में खासी बढ़ोतरी हुई है, जबकि उत्तर-पश्चिमी हिमालय के ग्लेसियरों के धीमी गति से पिघलने के कारण ब्यास और रावी नदियों का बहाव ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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