नैना देवी : भगदड़ के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नहीं (राउंडअप)

नैना देवी (हिमाचल प्रदेश), 4 अगस्त (आईएएनएस)। नैना देवी मंदिर में रविवार को मची भगदड़ से 145 लोगों की मौत भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं डाल सकी।

नैना देवी (हिमाचल प्रदेश), 4 अगस्त (आईएएनएस)। नैना देवी मंदिर में रविवार को मची भगदड़ से 145 लोगों की मौत भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं डाल सकी।

इस बीच, हिमाचल सरकार ने वैष्णो देवी की तर्ज पर श्रद्धालुओं को समूहों में मंदिर में प्रवेश देने का निर्णय किया है।

राज्य के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा, "वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश की जो प्रक्रिया अपनाई जाती है, हम उसका अध्ययन करेंगे और फिर उसे लागू करने का प्रयास करेंगे।"

उन्होंने कहा कि पुलिस बल की पर्याप्त संख्या में मौजूदगी नहीं होने तथा श्रद्धालुओं को पुलिसकर्मियों द्वारा पीटे जाने की शिकायतों की जांच कराई जाएगी। धूमल ने कहा, "जांच के बाद ही हम कोई कार्रवाई करेंगे।"

सूबे के बिलासपुर जिले की शिवालिक की पहाड़ियों के बीच स्थित नैना देवी मंदिर में रविवार को मची भगदड़ में मारे जाने वालों लोगों की संख्या 145 पहुंच गई लेकिन उसके दूसरे दिन भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सोमवार को पूजा-अर्चना की।

नैना देवी के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु ट्रक, ट्रैक्टरों, बसों पर चढ़कर पहुंचे। पंजाब के आनंदपुर साहिब से महज 13 किलोमीटर दूरी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने वाले अधिकांश रास्तों में दिन भर जाम लगा रहा।

अपने तीन मित्रों के साथ मंदिर की सीढ़ी की चढ़ाई कर रहे मंजीत कुमार ने बताया कि वे पिछले छह दिनों से पंजाब के सरहिंद से पैदल चलकर आ रहे हैं।

उन्होंेने कहा, "मैं अभी यहां पहुंचा हूं। हमने कल हुई दुर्घटना के बारे में सुना है, लेकिन इसका हमारे दर्शन करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।"

गौरतलब है कि रविवार को चट्टान खिसकने की अफवाह के बाद मची भगदड़ में 145 लोगों की मौत हो गई थी। रविवार की दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के जूते, चप्पल और अन्य सामान बिखरे पड़े होने के बावजूद भक्तों का आना लगातार जारी है।

मंदिर के पुजारी राजेश कुमार ने कहा, "घटना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन भक्तों के प्रवाह पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।"

उल्लेखनीय है कि बिलासपुर जिले में स्थित नैना देवी मंदिर भारत के 51 'शक्तिपीठों' में से है। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव के तांडव के समय यहां उनकी पत्नी सती की एक आंख गिर गई थी। वर्तमान मंदिर 1880 का बना है।

काफी संख्या में देश के सभी हिस्सों से श्रद्धालु यहां देवी के दर्शन के लिए आते हैं। 'सावन नवरात्रि' के दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं की यहां भारी भीड़ होती है।

उधर, हादसे में मारे गए लोगों में से अब तक 130 के शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है और पुलिस ने सोमवार सुबह मृतकों के परिजनों को शव सौंपना शुरू कर दिया।

इस हादसे में 39 बच्चे और 30 से ज्यादा महिलाएं मारी गईं। शवों को ट्रकों के जरिए पंजाब स्थित आनंदपुर साहिब अस्पताल लाया गया, जहां के स्थानीय अस्पताल के चिकित्सक रात भर शवों का पोस्टमार्टम करते रहे।

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी अशोक शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि प्रति घंटे 25-30 शवों का पोस्टर्माटम किया गया। इसके लिए चिकित्सकों की 10 टीमें बनाई गईं। आसपास के कस्बों से भी चिकित्सकों को भी बुलाना पड़ा।

हिमाचलप्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डी.एस. मनहस ने शिमला से आईएएनएस को बताया कि मंदिर में भगदड़ पत्थर टूटकर गिरने की अफवाह फैलने की वजह से मची।

इससे श्रद्धालुओं में आतंक फैल गया और इसी अफरा-तफरी में एक सुरक्षा अवरोधक भार नहीं सह पाने के कारण ढह गया।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंदिर में पुलिस का बहुत कम इंतजाम था और पुलिसकर्मी सिर्फ "लोगों पर लाठियां भांजने और थप्पड़ लगाने में" व्यस्त थे।

फतेहाबाद से आए बलि सिंह ने बताया, "जब मैंने मदद मांगी, एक पुलिस वाले में मुझे झापड़ रसीद कर दी। उसके बाद अन्य पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इसके बाद हालात और भी बदतर हो गए। अगर पुलिस लोगों की मदद करती तो इतनी ज्यादा संख्या में लोग हताहत नहीं होते।" इस हादसे में बलि सिंह की दो पुत्रियां मारी गईं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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