छाती के संक्रमण से होती है बच्चों को श्वास की बीमारी
सिडनी, 4 अगस्त (आईएएनएस)। एक नए शोध से पता चला है कि जन्म के पहले तीन महीनों में छाती का संक्रमण बच्चों में बाद में श्वसन संबंधी परेशानियों के रूप में सामने आता है। पूर्व में माना जाता था कि इसके लिए एंटी बायोटिक दवाएं जिम्मेदार होती हैं।
वेलिंगटन अस्थमा रिसर्च ग्रुप के निदेशक जुलियन क्रेन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में वेलिंगटन और क्राइस्टचर्च के 1,000 बच्चों का जन्म से लेकर चार वर्ष की उम्र तक पर्यवेक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने पहले तीन महीनों में बच्चों में हुए छाती के संक्रमण और एंटी बायोटिक के प्रयोग के आंकड़े एकत्रित किए।
पाया गया कि 15 महीने की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लगभग हर चार में से तीन बच्चों को एंटी बायोटिक दी जा चुकी थी। उनमें से 11.8 फीसदी को दमा, 39.6 फीसदी को एक्जीमा और 21.2 फीसदी को त्वचा की खराश की समस्या थी।
शोधकर्ताओं ने बताया कि बच्चों में होने वाले छाती के संक्रमण को अस्थमा की शुरुआत समझकर उसका ईलाज एंटी बायोटिक से किया गया जबकि वास्तव में उन्हें अस्थमा नहीं था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।











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