नेपाल में तेज हुआ हिन्दी विरोधी प्रदर्शन (लीड-1)
सुदेशना सरकार
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काठमांडू, 26 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय मूल के नवनिर्वाचित नेपाली उपराष्ट्रपति परमानंद झा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। उन्होंने पद व गोपनीयता की शपथ हिन्दी में क्या ली, पूरे नेपाल में उनके खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि हिन्दी में शपथ लेने के लिए झा को पूरे देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
यहां जारी प्रदर्शनों व भारी दबाव के बीच उपराष्ट्रपति ने आज अपनी चुप्पी तोड़ते हुए खुद को राष्ट्रवादी बताया और कहा कि राष्ट्र का हित उनके दिल में बसा हुआ है।
उपराष्ट्रपति अपने खिलाफ जारी प्रदर्शनों से उत्पन्न खतरों के कारण अपने कार्यालय भी नहीं जा पा रहे हैं।
नेपाल की बड़ी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े छात्र संगठनों ने राजधानी काठमांडू सहित अन्य इलाकों में बुधवार से जारी प्रदर्शन आज भी बरकरार रखा। प्रदर्शनकारी झा के खिलाफ लगातार नारेबाजी कर रहे हैं और उनके पुतले जला रहे हैं।
उपराष्ट्रपति झा ने बीबीसी रेडियो की नेपाल सेवा से कहा कि इस मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन कुछ लोगों द्वारा निहित स्वार्थो के कारण किए जा रहे हैं। इसे पूरे नेपाल की प्रतिक्रिया नहीं समझा जाना चाहिए।
झा ने कहा कि ,'हिंदी में शपथ लेना असंवैधानिक नहीं है। नेपाल के करीब दो लाख लोग हिंदी बोलते हैं।'
झा के हिंदी में शपथ लेने को सर्वोच्च न्यायालय में भी चुनौती दी गई है। अति राष्ट्रवादी वकील बालकृष्ण नेउपाने ने शुक्रवार को सर्वोच्च में न्यायालय में झा, राष्ट्रपति रामबरन यादव और कार्यवाहक प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के खिलाफ याचिका दायर की है।
नेउपाने ने अपनी याचिका में कहा है कि वह झा को या तो फिर से नेपाली या उनकी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने को कहे या फिर उन्हें पद छोड़ने को कहे।
गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति परमानंद झा सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। तराई की सबसे बड़ी पार्टी मधेशी जनाधिकार फोरम के सदस्य झा पिछले सप्ताह चतुष्कोणीय मुकाबले में विजयी होकर उपराष्ट्रपति बने हैं।
राष्ट्रपति पद के निर्वाचन में हार का सामना करने वाले माओवादी भी हिंदी विरोध में शामिल हो गए हैं। सूचना और संचार मंत्री तथा माओवादी पार्टी के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महरा ने शुक्रवार को हिंदी में शपथ लेने को 'खेदजनक' बताते हुए कहा कि इससे उपराष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंची है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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