परमाणु निरस्त्रीकरण पर वैश्विक सहमति बने : मनमोहन (लीड-2)
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। पोकरण-2 के दस वर्ष बाद भारत ने सोमवार को तयशुदा समय के अंदर परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में अंतर्राष्ट्रीय सहमति बनाने का आह्वान किया। साथ ही उसने विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर दिया।
वैश्विक मामलों की भारतीय परिषद (आईसीडब्ल्यूए) और सामरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र द्वारा सोमवार से नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से यह अनुरोध किया।
मनमोहन सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय, वैश्विक और भेदभाव रहित परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रतिबद्धता दोहराते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आश्वासन दिया कि भारत किसी के भी साथ हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होगा।
प्रधानमंत्री ने आंतकवादियों द्वारा परमाणु हथियारों को हासिल करने के 'बढ़ते खतरे' के मद्देनजर कहा कि इसका एक मात्र उपाय वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण है।
उन्होंने परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए एक ऐसा वातावरण बनाने की बात कही जिसमें परमाणु तकनीक का प्रयोग विनाशकारी कार्यो के बजाय राष्ट्रीय विकास के लक्ष्य को हासिल करना हो।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा वर्ष 1988 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश की गई शांति योजना का हवाला देते हुए मनमोहन सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिना किसी भेदभाव के परमाणु निरस्त्रीकरण की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "राजीव गांधी का विश्वास था कि सुरक्षित और हिंसा-मुक्त विश्व के लिए परमाणु निरस्त्रीकरणकी आवश्यकता है। उनके द्वारा बताई गई योजना में इसके लिए तीन चरणों में वर्ष 2010 तक सभी परमाणु हथियारों को नष्ट करने की बात कही गई थी।"
इस सम्मेलन में भारत के अलावा अमेरिका, चीन, रूस, आस्ट्रेलिया और कनाडा के निरस्त्रीकरण विशेषज्ञ और पूर्व राजनयिक हिस्सा ले रहे हैं। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी भी इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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