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अफजल मामले में भाजपा-कांग्रेस फिर आमने सामने (लीड-1)

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    नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु द्वारा अपनी फांसी के संबंध में जल्द से जल्द निर्णय लेने की इच्छा जाहिर करने के बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया है।

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए अफजल की फांसी के संदर्भ में जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की है वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने इसमें हो रही देरी को जायज ठहराया है।

    भाजपा ने केंद्र सरकार से कहा है कि या तो वह अफजल को फांसी पर लटका दे या फिर उसकी क्षमा याचना स्वीकार कर उसे माफ कर दे।

    पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूढ़ी ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, "अफजल ने केंद्र सरकार पर अनिर्णय की स्थिती पैदा करने और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि यदि अफजल के परिजनों ने उसकी क्षमा याचना की अपील की है तो वह इसे या तो स्वीकार करे और माफ कर दे या फिर अस्वीकार करके उसे फांसी पर लटका दे।"

    उन्होंने कहा कि अफजल मामला राष्ट्रीय महत्व का है और केंद्र लंबे समय से इस पर टालमटोल का रवैया अपनाए हुए है। भाजपा केंद्र सरकार पर इस मामले में निर्णय लेने में असमर्थ होने और वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाती है।

    उधर, कांग्रेस ने अफजल की फांसी के संबंध में हो रही देरी को जायज ठहराया है। कांग्रेस ने कहा है कि माफी स्वीकार और अस्वीकार करने का फैसला एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया जाता है, जिसमें समय लगता है।

    पार्टी प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा, "अफजल के बयान की कोई विश्वसनीयता नहीं है। यह साक्षात्कार सरकार की अनुमति से लिया गया है या फिर उसने ऐसा कहा भी है या नहीं। भाजपा को यह समझना चाहिए कि फांसी देना या न देना संवैधानिक प्रकिया का हिस्सा है। इसमें देरी होती है।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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