सोनभद्र में प्यास से हुई मौत पर गरमाने लगी है राजनीति

वाराणसी, 2 जून (आईएएनएस)। गत बुधवार को सोनभद्र के चौपन ब्लाक के कुड़वां गांव में बुझ्झावान चेरो की हुई कथित प्यास से मौत ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। हाल ही में कुड़वां गांव का दौरा करके लौटे भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा काशी प्रान्त के प्रभारी भूपेश चौबे ने बताया कि बुझ्झावान की प्यास से तड़प तड़प कर हुई मौत ने क्षेत्र के पूरे जनमानस को न सिर्फ झकझोर कर रख दिया है बल्कि पेय जल संकट से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

चौबे ने बताया की इस मामले को हमारी पार्टी विधानसभा में जरूर उठाएगी और गरीबों की रहनुमाई का दावा करने वाली सरकार को सोनभद्र में पानी की विकराल होती समस्या पर जबाब देना पड़ेगा। उन्होंने कहा की बुझ्झावान की मौत तो एक बानगी है जिस पर मीडिया की नजर पड़ गई वरना न जाने कितने वाकये रोज हो रहे हैं और उसकी भनक तक किसी को नही लगती है।

इधर प्रशासनिक अमला बुझ्झावान की प्यास से हुई मौत को कोरी बकवास बताने पर तुला हुआ है लेकिन राजनीतिक संगठनों द्वारा इसे मुद्दा बनाये जाने पर सोनभद्र के जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी अंजनी कुमार को उस गांव का दौरा करने का आदेश दिया। दौरा करके लौटे अंजनी कुमार से जब हकीकत जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने रिपोर्ट अपने जिलाधिकारी को देने की बात करके सवाल को टाल दिया। लेकिन जिले के डी एम अजय शुक्ला ने बताया कि बुझ्झावान की मौत प्यास से नही बल्कि टीबी की बीमारी से हुई है। उस गांव में पानी की कितनी समस्या है इस सवाल पर जिलाधिकारी अजय शुक्ला ने बताया की वैसे तो पानी की समस्या पूरे सोनभद्र में है लेकिन इतनी भी नहीं की प्यास से मौत हो जाए।

गौरतलब है की कुड़वां गांव पड़ता तो है चौपन ब्लाक में लेकिन यहां के लोगों को पानी लेने के लिए तीन किलोमीटर दूर दुध्धी ब्लाक के करैया गांव में जाना पड़ता है। बुझ्झावान काफी दिनों से बीमार था इसलिए वह पानी के लिए या तो दूसरों पर निर्भर था या फिर अपनी 12 साल की बच्ची पर जो दिन में एक बार पानी लेने जाती थी और उसी से दिन भर काम चलता था। पानी की कमी से बुझ्झावान कई दिनों पुराना पानी भी उपयोग में लाता रहता था। गांव के ही रामनरेश और नारायण ने बताया कि यह तो नही पता कि इनकी मौत प्यास से हुई या नही लेकिन इतना जरूर है कि जब ये मरे तो इनके घर में एक बूंद भी पानी नहीं था।

क्षेत्र में पानी की समस्या पर लड़ाई का दावा करने वाले नरेन्द्र नीरव ने बताया कि जिस तरह से भूख से मरना एक प्रोसेस है उसी तरह प्यास से मरना भी एक प्रोसेस है। बुझ्झावान जब मरा तब उसके घर में एक बूंद भी पानी नहीं था और वह खांसते -खांसते मर गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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