भारतीय अर्थव्यवस्था का कछुआ अंत में एशियाई खरगोशों से जीतेगा : प्रधानमंत्री
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना धीमे पर लगातार चलने वाले कछुए से करते हुए बताया कि कैसे उनकी सरकार बढ़ती महंगाई और घटती औद्योगिक विकास दर से निपटने के उपाय कर रही है।
भारतीय विज्ञान भवन में एसोसिएटेड चैम्बर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "धीमे और लगातार चलने वाला ही दौड़ जीतता है।"
प्रधानमंत्री ने कहा ,"भारतीय अर्थव्यवस्था का कछुआ कई एशियाई खरगोशों के मुकाबले जीतेगा। भारत की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत और उससे ऊपर की वृद्धि लगातार जारी रखे हुए है। आने वाले समय में भारत विश्व अर्थव्यस्था के इंजन के रूप में उभरेगा।"
प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे तेल के आयात पर निर्भर विकासशील देशों की प्रगति को धक्का पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है।
मनमोहन सिंह ने कहा,"विश्व में गरीबी के खिलाफ संघर्ष को इससे भारी धक्का पहुंच सकता है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में 1950 से 80 तक 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर रही,1980 से 2000 तक 5.5 फीसदी विकास दर थी। अब 2004 के बाद से लगातार 9 प्रतिशत से ऊपर की विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था की बुद्धिमत्ता का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी नीति के आलोचकों की भी कमी नहीं है। लेकिन आज हमारी अर्थव्यवस्था ने जो भी अर्जित किया है उस पर हमें गर्व और संतुष्टि है। भारत पिछले दो दशकों से वैश्वीकरण की चुनौतियों का बढ़िया तरीके से मुकाबला कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में मंदी और कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर 8 प्रतिशत बनी हुई है। अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र इसके पहले इतना मजबूत कभी नहीं थे।
प्रधानमंत्री ने आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती हुई कीमतों और विकसित देशों द्वारा बाजार संरक्षण की नीति अपनाने के प्रति चिंता प्रकट की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में दुनिया को कृषि में निवेश और तकनीकी सुधार करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे खेती की उपज बढ़ाई जा सके।
इसके पहले वित्तीय वर्ष में भारतीय कृषि क्षेत्र ने रिकार्ड 4.5 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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