Success Story: वो अफसर जो परीक्षा में हो गए थे फेल, RAS दलपत सिंह के नाम 19 बार असफल होने का रिकॉर्ड

किसी परीक्षा में फेल हो जाने का मतलब जिंदगी खत्‍म हो जाना नहीं है। ये आईएएस, आईपीएस व आईएएस ऐसे ही हैं, जो स्‍कूल-कॉलेज में बार-बार फेल हुए थे। फिर मेहनत करके अफसर बन गए।

IAS IPS Officers Motivational Story

IAS IPS Officers Motivational Story: इन दिनों स्‍कूल-कॉलेज की परीक्षाओं के परिणाम आ रहे हैं। कई विद्यार्थियों के हिस्‍से असफलता आ रही है। स्‍कूल-कॉलेज हो या फिर किसी प्रतियोगी परीक्षा में फेल हो जाने के बाद अवसाद में चले जाने वालों की भी कमी नहीं है। सुसाइड तक जैसे कदम उठा ले रहे हैं जबकि ऐसे विद्यार्थियों को सोचना चाहिए कि किसी परीक्षा में फेल हो जाने का मतलब जिंदगी खत्‍म हो जाना नहीं है। जिंदगी में सफल होने के सबको खूब मौके मिलते हैं, मगर कामयाब वो ही हो पाते हैं, जो अपनी असफलता से कुछ सीखकर फिर से मेहनत करें और आगे बढ़ें।

आज हम आपको ऐसे ही लोगों की सक्‍सेस स्‍टोरी बताने जा रहे हैं, जो कभी ना कभी फेल हुए। इसके बाद अपनी असफलता को खुद की कमजोरी बनाने की बजाय ताकत बनाई। जमकर मेहनत की। अफसलताओं से जरा भी नहीं डरे। ना अपने लक्ष्‍य से पीछे हटे। नतीजा ये है कि ये लोग आज देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में आईएएस, आईपीएस व आरएएस सरीखे पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।

1. Dalpat Singh Rathore : 19 बार फेल होकर पास की RAS परीक्षा

1. Dalpat Singh Rathore : 19 बार फेल होकर पास की RAS परीक्षा

  • राजस्‍थान के पाली जिले के गांव गुड़ाकेसरसिंह के रहने वाले दलपत सिंह राठौड़ ने साबित कर दिखाया कि बुलंद हौसलों के दम पर कामयाबी हासिल की जा सकती है।
  • दलपत सिंह राठौड़ स्‍कूल-कॉलेज व प्रतियोगी परीक्षाओं को मिलाकर कुल 19 बार फेल हुए। इतनी बार फेल होने पर सबने यह मान लिया था कि अब ये अपनी जिंदगी में सफल नहीं हो सकते।
  • गांव गुड़ाकेसर सिंह के मोहन सिंह राठौड़ व सुमन कंवर के दलपत सिंह राठौड़ ने असफलताएं मिलने के बावजूद हार नहीं मानी।
  • अंत में राजस्‍थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2007 में 448वीं रैंक और फिर अगले साल फिर इसी परीक्षा में 550वीं रैंक हासिल करने राजस्‍थान में अफसर बन गए।
  • दलपत सिंह राठौड़ ने आरएएस परीक्षा पास करके राजस्‍थान लेखा सेवा के अधिकारी बने। वर्तमान में आरटीडीसी में जनरल मैनेजर पद पर हैं।
 2. कुमार अनुराग, आईएएस, बिहार कैडर

2. कुमार अनुराग, आईएएस, बिहार कैडर

  • बिहार में कटिहार जिले के रहने वाले कुमार अनुराग भी कामयाबी की मिसाल हैं। ये वो शख्‍स हैं, जो कॉलेज में स्‍नातक की पढ़ाई के दौरान कई विषयों में फेल हो गए थे। इसके बावजूद आज अपने होम कैडर में आईएएस अधिकारी हैं।
  • कॉलेज में मिली असफलताओं से डरे नहीं और यूपीएससी की तैयारियां शुरू की। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2017 में अखिल भारतीय स्‍तर पर 677वीं और साल 2018 में 48वीं रैंक हासिल की।
  • यूपीएएसी पास करने के बाद बिहार कैडर में आईएएस बने। नालंदा में एसडीएम के रूप में भी सेवाएं दीं।
 3. जगदीश बांगड़वा, आईपीएस, गुजरात कैडर

3. जगदीश बांगड़वा, आईपीएस, गुजरात कैडर

  • UPSC की सिविल सेवा परीक्षा 2018 पास करके महज 23 साल की उम्र में गुजरात कैडर में आईपीएस बने जगदीश बांगड़वा राजस्‍थान के बाड़मेर जिले के बायतु के रहने वाले हैं।
  • जगदीश बांगड़वा दसवीं कक्षा में फेल हो गए थे। फिर दूसरे प्रयास में दसवीं व कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की तो लोग सोचते थे जो विद्यार्थी दसवीं बोर्ड परीक्षा पास नहीं कर पाया था वो यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा क्‍या ही पास कर पाएगा?
  • जगदीश बांगड़वा ने अपनी मेहनत पर भरोसा रखा और साल 2018 में 486वीं रैंक से यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करके भारतीय पुलिस सेवा के अफसर बन गए।
 4. अंजू शर्मा, आईएएस, गुजरात कैडर

4. अंजू शर्मा, आईएएस, गुजरात कैडर

  • गुजरात कैडर की आईएएस अधिकारी अंजू शर्मा तो स्‍कूल में अर्धवार्षिक परीक्षा तक पास नहीं कर पाई थीं। फेल हो जाने पर ये तनाव में जरूर में आ गई थीं, मगर फिर भी मेहनत करना नहीं छोड़ा। नतीजा यह रहा है कि साल 1993 की वो अफसलता को पीछे छोड़ यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा तक पास कर ली।
  • गुजरात में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहीं अंजू शर्मा मूल रूप से राजस्‍थान की राजधानी जयपुर की रहने वाली हैं। आईएएस बनने के बाद इन्‍होंने एक किताब लिखी। 'आई ऑफ द स्टॉर्म- डिस्कवर योर ट्रू सेल्फ' शीर्षक से लिखी किताब काफी चर्चित रही।
  • आईएएस अंजू शर्मा का मानना है कि जीवन में असफलता हमें कुछ ना कुछ सिखाने के लिए आती है। उससे अवसाद में जाने की बजाय सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
 5.मनोज कुमार शर्मा, आईपीएस, महाराष्‍ट्र कैडर

5.मनोज कुमार शर्मा, आईपीएस, महाराष्‍ट्र कैडर

  • स्‍कूल में फेल होने के बाद भी संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास करके असफर बनने वालों में मनोज कुमार शर्मा का नाम भी शामिल है।
  • अपने कई साक्षात्‍कार मनोज कुमार शर्मा आईपीएस बता चुके हैं कि ये 12वीं कक्षा में हिंदी विषय को छोड़कर शेष सभी में फेल हो गए थे।
  • इससे पहले नौवीं और दसवीं कक्षा महज थर्ड डिविजन से पास कर पाए थे। फिर भी आज आईपीएस अफसर हैं।
  • मनोज कुमार शर्मा का मानना है कि जिंदगी हो या कोई परीक्षा। इंसान अगर हार मान ले तो हार है और ठान ले तो जीत।
6. रुकमणी रियार, आईएएस राजस्थान कैडर

6. रुकमणी रियार, आईएएस राजस्थान कैडर

  • राजस्‍थान कैडर की तेज तर्रार आईएएस अधिकारी रुकमणी रियार तो छठीं कक्षा भी पास नहीं कर पाई। फिर भी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करके साल 2011 में आईएएस अधिकारी बन गईं। श्रीगंगानगर जिला कलेक्‍टर रियार के पति सिद्धार्थ सिहाग भी आईएएस हैं, जो चूरू जिला कलेक्टर रहे।
  • अखिल भारतीय स्‍तर पर दूसरी रैंक हासिल करने वाली रुकमणी रियार​ पंजाब के चंडीगढ़ की रहने वाली हैं। इन्‍होंने अमृतसर के गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से सोशल साइंस में ग्रेजुएशन व टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में सोशल एंटरप्रेन्योरशिप में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

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