कभी दाने-दाने के लिए था मोहताज, आज दुनिया में बज रहा है डंका, मिलिए बुंदेलखंड के इस योग गुरू से
नई दिल्ली। बुंदेलखंड के रहने वाले सोहन सिंह को शायद आप नहीं जानते होंगे या फिर आज से पहले आपने इनके बारे में सुना नहीं होगा। लेकिन सोहन सिंह योग गुरु के तौर पर अपना बड़ा नाम बना चुके हैं। सोहन सिंह बुंदेसखंड के ललितपुर के विरधा विकास खंड के बरखेड़ा गांव के रहने वाले हैं। सोहन गरीब परिवार से आते थे, इसलिए उनका बचपन भी अभावों में गुजरा है। कॉलेज में उन्हें उसके शिक्षक से योग के बारे में जानकारी मिली।

कभी था दाने-दाने को मोहताज
योग के प्रति वो आकर्षित हो गए। ये आकर्षण ऐसा था कि वो दिन में नौकरी करते थे और रात को लोगों को योग सिखाते थे। लोग उनके योग को बेहद पसंद करने लगे और यहीं योग सोहन को चीन तक ले गया। चीन में उन्होंने सोहन योगा नाम से संस्थान शुरू किया जिसके करीब 9 ब्रांच चल रहे हैं।

बुंदेलखंड से चीन तक का सफर
अपने कठिन दिनों को याद करते हुए सोहन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वो उनके पिता रेलवे में नौकरी करते थे, लेकिन उनकी सैलरी सूदखोरों के पास चली जाती थी, क्योंकि उनका परिवार कर्ज में डूबा था। सूखाग्रस्त होने की वजह से खेती भी नहीं थी। घर का खर्च चलाने के लिए मां मजदूरी करती थी। घर की चुनौतियों के आगे सोहन हारे नहीं बल्कि उन्होंने उसे अपनी ताकत बना ली।

योग के बल पर बनी पहचान
पहले इंदौर और फिर थाईलैंड में नौकरी की। कंप्यूटर में पीएचडी करने चीन पहुंचे। नौकरी और पैसा होने के बावजूद सोहन योग से अलग न हो सके। उन्होंने वहां योग सिखाना शुरू किया। लोगों को उनका योग इतना पसंद आया कि चंद सालों के भीतर ही उन्होंने चीन में अपने योग के 4 ब्रांच शुरू कर लिए और लोगों के बीच मशहूंर हो गए। आज बुंदेलखंड के लोग सोहन सिंह को सम्मान के साथ बुलाते हैं और उनकी तारीफ करते हैं।












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