Mohan Dan Success Story: 7 बार की असफलता नहीं तोड़ पाई हौसला, 8वीं कोशिश में पास की UPSC
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 710वीं रैंक पाने वाले मोहनदान बाड़मेर जिले की शिव तहसील के गांव झाफली के रहने वाले हैं।
आपने भी सुना होगा कि सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा मैराथन है। बहुत सारे अभ्यर्थी तो एक-दो बार की असफलता से ही हार मान लेते हैं। मेहनत करना छोड़ देते हैं।
इस मामले में राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव तहसील के गांव झाफली के मोहनदान की सक्सेस स्टोरी सबसे जुदा है। हर किसी को प्रेरित करने वाली है। ये यूपीएससी में सात बार फेल हुए और आठवें प्रयास में कामयाबी ने इनके कदम चूम लिए।

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में मोहनदान कहते हैं कि साल 2014 से 2017 तक यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा मेंस लिखा, मगर इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाया। 2018, 2019 और 2021 में भी फेल हुए। फिर साल 2022 में 710वीं रैंक हासिल करके यूपीएससी क्रैक की।
मोहनदान ने बताया कि रैंक को देखते हुए भारतीय राजस्व व भारतीय रेलवे में ग्रुप ए की सर्विस मिलना तय है। ओबीसी श्रेणी से आने वाले मोहनदान अधिकतम नौ प्रयास दे सकते थे। इनकी उम्र में 35 साल हो चुकी थी। लगातार मेहनत से मुकाल हासिल हो ही गया।
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करने से पहले मोहन दान स्कूल-कॉलेज में शिक्षक के रूप में चुने जा चुके हैं। वर्तमान में कल्याणपुर कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। पहले से जॉब में होने के कारण पढ़ाई के लिए समय नहीं निकाल पाते थे।

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बाड़मेर जिले में एक हजार की आबादी वाले गांव झाफली से यूपीएएसी पास करने वाले पहले शख्स हैं। खास बात यह है कि मोहनदान ने कहीं से यूपीएससी की कोचिंग नहीं ली। हालांकि इंटरव्यू की तैयारी के लिए मॉक इंटरव्यू दिए।
मोहनदान की पत्नी वंदना चारण भी सर्विस में हैं। वे जोधपुर में सहायक लेखाधिकारी हैं। इनके अलावा एक एयरफोर्स और दूसरा शिक्षक है। दो छोटे भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं। दो बहन हैं। एक की शादी हो चुकी है।












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