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Chhavi Gupta: कैट टॉपर से लेकर यूट्यूब चैनल तक, कैसे छवि गुप्ता बना रही हैं अपनी अलग पहचान

Chhavi Gupta story: छवि गुप्ता अपने यूट्यूब चैनल के जरिए करियर से जुड़ी कई चीजों के बारे में बात करती हैं। यहां वह मेंटल हेल्थ से लेकर CAT में महारत हासिल करने तक के टिप्स देती हैं।

Chhavi Gupta story

Chhavi Gupta story: कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) टॉप करने वाली छवि गुप्ता सोशल मीडिया पर अब अपनी अलग पहचान बना रही हैं। 2011 से 2022 के बीच कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) में 100 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाली अब तक सिर्फ लड़कियां हुई हैं। उन्ही में से एक हैं छवि गुप्ता। फिलहाल छवि गुप्ता एक कॉर्पोरेट कंपनी प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम कर रही हैं। लेकिन इसके साथ-साथ ही छवि गुप्ता एक YouTube चैनल भी चलाती हैं, जहां वह CAT उम्मीदवारों को कैसे तैयारी करनी है, इसकी जानकारी देती हैं।

मेन्टोर भी हैं छवि गुप्ता

मेन्टोर भी हैं छवि गुप्ता

इसके अलाव छवि गुप्ता ने अपने इंस्टाग्राम बॉयो में बताया है कि वह एक मैंटोर भी हैं। छवि के यूट्यूब पर 22,000, लिंक्डइन पर 85,000 से ज्यादा फॉलोअर्स और क्वोरा पर 35,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। साल 2011 में छवि गुप्ता ने जेईई एडवांस क्रैक किया और आईआईटी दिल्ली में बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक के लिए चुनी गईं। इसके बाद, उन्होंने उसी क्षेत्र में एमटेक किया और 2016 में 10 सीजीपीए में से 8.57 अंक के साथ ग्रेजुएट हुईं। बाद में, उन्होंने कैट को 100 परसेंटाइल स्कोर करके पास किया।

IIM अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान शुरू किया था YouTube चैनल

IIM अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान शुरू किया था YouTube चैनल

दिल्ली की रहने वाली छवि गुप्ता ने बताया कि वह आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाई कर रही थीं, जब उन्होंने 2019 में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था। छवि ने कहा कि कैट के कई उम्मीदवार उनसे ये जानना चाहते थे कि इसकी तैयारी कैसे करें। छवि गुप्ता ने कहा, ''मैंने महसूस किया कि शिक्षा को लेकर लोगों में बहुत भ्रम है और कई ऐसे छात्र हैं, जो गाइडेंस चाहते हैं। मैं YouTube लोगों के सवाल के जवाब देती। फिर मैंने इसको आगे भी जारी रखने का फैसला किया ।

आईआईटी और आईआईएम में महिलाओं के बारे में बात करते हुए, छवि बताती हैं कि कैसे लड़कों की तुलना में लड़कियां बहुत कम हैं। छवि ने कहा, ''मेरी बीटेक क्लॉस में सिर्फ 10 फीसदी लड़कियां थीं। एमबीए के दौरान 33 फीसदी लड़कियां थी। हालांकि ये भी एक बड़ी संख्या नहीं है।''

 महिलाएं अब भी क्यों रह जाती हैं पीछे...?

महिलाएं अब भी क्यों रह जाती हैं पीछे...?

पुरुषों की तुलना में कम महिलाएं क्यों हैं....? इसका जवाब देते हुए छवि गुप्ता कहती हैं, ''इसका सबसे मुख्य कारणों में से एक सामाजिक दबाव है। कई लड़कियों को उनके परिवारों द्वारा एक निश्चित उम्र के बाद पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। आज के समय और उम्र में भी, मैं बहुत सी लड़कियों से मिलती हूं जो मुझे बताती हैं कि उनके पास कैट पास करने के लिए सीमित समय है क्योंकि उनका परिवार उन्हें शादी करने के लिए दबाव बना रहा है। परिवार का ऐसा करना, उनकी मानसिक शक्ति को भी प्रभावित करता है क्योंकि वे लगातार इस बात को लेकर परेशान रहती हैं। इसी वजह से कई महिलाएं बेहतर संस्थान चाहकर भी जो भी कॉलेज मिलता है, उसमें सेटल हो जाती हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि धीरे-धीरे इस संख्या में सुधार हो रहा है। अब, महिलाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों में भी सुधार हुआ है।''

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