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Chhattisgarh: रायपुर सेंट्रल जेल की अनोखी पहल, ज्योतिष और आयुर्वेद की शिक्षा से बदल रही है कैदियों की सोच

Raipur Central Jail: आमतौर पर जेल का नाम आते ही लोगों के जेहन में एक बंद, कठोर और नकारात्मक वातावरण की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या हो जब आपको ये पता चले की जेल में भी कैदियों के तरास कर उनकी जिंदगी बदलती है। कुछ ऐसा ही हुआ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में जहां बदलाव का एक प्रयास जारी रही है।

यहां के कैदी अब सिर्फ सजा नहीं काट रहे, बल्कि अपनी जिंदगी को नई दिशा देने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं। यहां इन कैदियों को वैदिक शिक्षा पद्धति के तहत ज्योतिष, आयुर्वेद और विभिन्न धार्मिक संस्कारों की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

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Raipur Central Jail: शिक्षा और सुधार का अनोखा मेल

रायपुर सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक योगेश सिंह ने एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, "कैदियों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक संस्कृत शिक्षा प्रदान की जा रही है। 11वीं और 12वीं के स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत ज्योतिष, आयुर्वेद और विभिन्न संस्कारों की विधियों का अध्ययन कराया जाता है।"

जेल प्रशासन के इस कदम से कैदियों का कौशल विकास (Skill Development) किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनकी सोच में बदलाव आता है, बल्कि वे समाज में एक नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहे हैं।

कितने कैदी हो रहे हैं लाभान्वित?

फिलहाल इस विशेष वैदिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 68 कैदी पंजीकृत हैं, जो नियमित रूप से कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा जेल में कुल 291 कैदी प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, ओपन स्कूल परीक्षा, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएन तक की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यह शिक्षा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के माध्यम से संचालित हो रही है।

शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास की कोशिश

जेल प्रशासन का मानना है कि सकारात्मक गतिविधियों में लगने से कैदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार में अत्यंत प्रभावी होती है। अधीक्षक योगेश सिंह ने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल सजा देना नहीं है, बल्कि उन्हें समाज के लिए एक सकारात्मक व्यक्ति बनाना है। जब ये कैदी जेल से बाहर निकलेंगे, तो वे ज्योतिषाचार्य, आयुर्वेदिक सलाहकार या संस्कारों को जानकर समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकते हैं।"

संस्कृत शिक्षा के अंतर्गत कैदियों को केवल शास्त्रों का अध्ययन ही नहीं, बल्कि आचार्य परंपरा, विवाह, यज्ञ, श्राद्ध जैसे धार्मिक संस्कारों की विधियाँ, राशि और ग्रहों की स्थिति, और प्राकृतिक चिकित्सा आधारित आयुर्वेदिक उपचार विधियाँ सिखाई जाती हैं। यह न सिर्फ उनकी शिक्षा का स्तर बढ़ाता है, बल्कि इससे उनका सेल्फ कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है जिससे वो समाज की मुख्यधारा में जुड़ने में मदद करता है।

बदलती सोच, बनती नई राह

इन प्रयासों से जेल अब एक सुधारगृह की वास्तविक परिभाषा को सार्थक करती दिख रही है। पढ़ाई में जुटे कई कैदी अब खुद को एक नई जिंदगी के लिए तैयार महसूस कर रहे हैं। शिक्षा के इस उजाले ने उनकी सोच को नकारात्मकता से निकालकर एक नई दिशा दी है।

रायपुर सेंट्रल जेल की यह पहल देशभर की जेलों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन सकती है। जब सज़ा सुधार बन जाए और शिक्षा जीवन का नया आधार, तो न केवल अपराध में कमी आती है, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा मिलती है। रायपुर जेल की यह तस्वीर बताती है कि बदलाव संभव है, अगर दृष्टिकोण सही हो।

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